नयी दिल्ली: केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस धारणा को एक मिथक बताया है कि बच्चियां केवल अशिक्षित लोगों के बीच असुरक्षित हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षित परिवारों में भी बेटा और बेटी के बीच भेदभाव देखा जा सकता है.

ईरानी ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि उनका मंत्रालय परिवार और समाज में लैंगिक आधार पर असमानता की समस्या से निपटने के लिये ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को आगे बढ़ा रही है. इस अभियान के तहत असमानता से प्रभावित इलाकों में जागरुकता के लिये सामाजिक संगठनों का सहयोग अपेक्षित है. उन्होंने कहा कि इस दिशा में पिछले चार सालों से चल रहे सतत प्रयासों के फलस्वरूप 25 राज्यों में स्थिति में सुधार हुआ है. साथ ही उन्होंने कांग्रेस के जयराम रमेश की उस बात से सहमति जतायी कि औद्योगिक एवं शैक्षिक तौर पर अग्रणी राज्यों में बच्चियों के साथ भेदभाव बरते जाने के मामले स्थिति में गिरावट आई है.

उल्लेखनीय है कि रमेश ने कहा था कि बाल लिंगानुपात के मामले में अग्रणी राज्यों में गिरावट दर्ज की गयी है. ईरानी ने कहा कि ‘समान उपाय 2030’ सिविल सोसाइटी, विकास तथा निजी क्षेत्र से आने वाले कई क्षेत्रीय तथा वैश्विक संगठनों का एक संयुक्त प्रयास है. इसके तहत वैश्विक स्त्री पुरुष समानता सूचकांक प्रकाशित किये गये हैं. इनमें शामिल 129 देशों में भारत को 95वां स्थान पर रखा गया है.