नई दिल्ली| नरेंद्र मोदी सरकार ने बुधवार को केंद्रीय राज्य मंत्री अनंत कुमार हेगड़े की टिप्पणी से किनारा कर लिया. अनंत कुमार ने ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द की आलोचना की थी और कहा था कि बीजेपी सरकार संविधान की प्रस्तावना से इस शब्द को हटाने के लिए ‘संविधान में संशोधन करेगी.’ राज्यसभा में विपक्ष ने एकजुट होकर हेगड़े की टिप्पणी का विरोध किया. संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने सदन से कहा कि हम संविधान के प्रति वचनबद्ध हैं. हम मंत्री की टिप्पणी से सहमत नहीं हैं.

हेगड़े ने कथित तौर पर अपनी टिप्पणी में कहा था कि धर्मनिरपेक्ष लोग अपने खून के बारे में नहीं जानते. हां, संविधान ने हमें धर्मनिरपेक्ष कहने का अधिकार दिया है..लेकिन संविधान में कई बार संशोधन किया गया है, हम भी इसमें संशोधन करेंगे. हम इसी के लिए सत्ता में आए हैं.

विपक्ष ने बुधवार को मंत्रिमंडल व संसद से हेगड़े के निष्कासन की मांग की. विपक्ष ने कहा कि उन्होंने भारत के संविधान व इसके निर्माता भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है. विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर बार-बार सदन स्थगित करने को मजबूर किया.

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने देश के संविधान के बारे में विवादित बयान देने वाले बीजेपी नेता और केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े से संसद और देश की जनता से माफी मांगने को कहा है. आजाद ने आज संसद के दोनों सदनों में हेगड़े के बयान पर हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित होने के बाद कहा कि सस्ती लोकप्रियता के लिये मंत्रियों द्वारा विवादित बयान देने की गलत परंपरा का सूत्रपात हुआ है.

आजाद ने कहा कि हेगड़े अगर संसद के दोनों सदनों और देश की जनता से माफी नहीं मांगते हैं तो प्रधानमंत्री उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें. आजाद ने कहा कि हेगड़े पहले भी बतौर सांसद विवादित बयान देते रहे हैं, शायद इसी के इनाम में उन्हें मंत्री बनाया गया. हमें उम्मीद थी कि हेगड़े मंत्री बनने के बाद ऐसे बयान नहीं देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उच्च सदन में कांग्रेस संसदीय दल के नेता आजाद ने कहा कि हेगड़े ने अपने बयान में दो बातें कहीं, पहली बीजेपी का सत्ता में आने का मकसद देश का संविधान बदलना है, और दूसरा धर्मनिरपेक्षता में यकीन करने वालों के खुद ‘बाप-दादाओं’ का पता ही नहीं है.

आजाद ने कहा कि हेगड़े के दूसरे बयान से साफ है कि वह देश के संविधान में विश्वास ही नहीं करते हैं. क्योंकि धर्मनिरपेक्षता संविधान का आधार स्तंभ है जिसे संविधान की प्रस्तावना में जगह दी गयी है. उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेकर संविधान में यकीन नहीं करने वाले व्यक्ति को मंत्री पद पर रहने को कोई अधिकार नहीं है.

आजाद ने कहा कि कांग्रेस ने सरकार से ऐसे व्यक्ति को मंत्री बनाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज करा दी है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिये एक दिन का समय मांगा है, देखते हैं सरकार क्या रुख अपनाती है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस का मत नहीं है बल्कि इस प्रकरण में समूचे विपक्ष का यही मत है, जिससे सभापति को अवगत करा दिया है.

तीन तलाक को प्रतिबंधित करने से जुड़े विधेयक पर कांग्रेस के रुख के सवाल पर आजाद ने कहा कि पार्टी का जो भी रुख होगा वह देशहित में होगा और इस पर कांग्रेस का रुख कल सदन में विधेयक पेश होने पर ही स्पष्ट हो जायेगा.