नई दिल्ली: भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को भारत लाए जाने का प्रयास कर रही भारत सरकार को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन के गृह विभाग ने मंजूरी दे दी है. खबर के अनुसार, ये मंजूरी आज ही दी गई है.

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भारत के लिए इसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पिछले कुछ समय से लगातार माल्या का प्रत्यर्पण कराने का प्रयास कर रही थी. एएनआई की खबर के अनुसार, हालांकि ब्रिटेन के होम सेक्रेटरी कार्यालय के मुताबिक विजय माल्या को इस आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार है. माल्या अगर चाहे तो अगले 14 दिनों के अंदर इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकता है. ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले साल 9 दिसंबर 2018 को विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया था. माल्या के ऊपर फर्जीवाड़ा करने, मना-लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानून यानी फेमा (Foreign Exchange Management Act) के उल्लंघन का आरोप है.

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बता दें कि 5 जनवरी, 2019 को ही मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर फरार शराब कारोबारी विजय माल्या को शनिवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी (एफईओ) घोषित किया था. माल्या नए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के प्रावधानों के तहत एफईओ घोषित होने वाला पहला कारोबारी बन गया था. यह अधिनियम पिछले वर्ष अगस्त में प्रभावी हुआ था. प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) की अदालत से माल्या को भगोड़ा घोषित करने और उसकी संपत्तियों को जब्त करने और उन्हें केन्द्र सरकार के नियंत्रण में लाने का अनुरोध किया था. विशेष न्यायाधीश एम एस आजमी ने माल्या के वकील और ईडी के वकील की व्यापक दलील सुनने के बाद माल्या को कानून की धारा 12 के तहत एफईओ घोषित किया. माल्या मार्च 2016 में भारत से चला गया था.

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ठप किंगफिशर एयरलाइंस के प्रमुख रहे 62 वर्षीय माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और धन शोधन का आरोप है. पिछले साल अप्रैल में प्रत्यर्पण वॉरंट पर गिरफ्तारी के बाद से माल्या जमानत पर है. सीबीआई ने इस मामले में कहा कि उम्मीद है विजय माल्या को जल्द से जल्द भारत लाकर केस को आगे बढ़ाया जाएगा. हमने उसे भारत लाने के लिए काफी मेहनत की. हम इस केस को लेकर कानूनी रूप से मजबूत स्थिति में थे क्योंकि हमारे पास तथ्य थे. इसलिए हमें यकीन था कि विजय माल्या के प्रत्यर्पण में हमें कामयाबी मिलेगी.