संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा’ से जूझ रहा है और दिल्ली का प्रदूषण स्तर जानलेवा जैसा प्रतीत होता है. संयुक्त राष्ट्र की चिल्ड्रेंस एजेंसी ने दक्षिण एशिया की सरकारों से वायु गुणवत्ता के संकट से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की अपील की. भारत में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के लिए कार्यक्रम प्रबंधन अधिकारी वलेन्टिन फोल्तस्कु ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने प्रदूषण को अदृश्य हत्यारा बताया.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र न्यूज से कहा कि उत्तर भारत और गंगा के मैदानी हिस्से में जो स्थिति है वह जानलेवा है. बहुत खराब है. दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई सम- विषम योजना का हवाला देते हुए, फोल्तस्कु ने कहा कि इस तरह के उपाय से कोई बड़ा असर दिखने की उम्मीद नहीं है.

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वहीं दूसरी तरफ यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वायु प्रदूषण विषाक्तता (toxicity) बच्चों के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकती है. इसके लिए उन्होंने भारत और दक्षिण एशिया से वायु प्रदूषण के संकट से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया है.

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक फोर ने हाल ही में भारत का दौरा किया था. उन्होंने कहा कि मैंने पहली बार देखा कि कैसे बच्चे वायु प्रदूषण के गंभीर परिणामों से पीड़ित रहते हैं. फोर ने कहा कि हवा की गुणवत्ता संकट के स्तर पर थी. आप एयर फिल्ट्रेशन मस्क के पीछे से भी जहरीले कोहरे की गंध ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण बच्चों को सबसे गंभीर रूप से प्रभावित करता है और इसका प्रभाव जीवन देने वाले अंगों पर भी पड़ता है क्योंकि उनके पास छोटे फेफड़े होते हैं, वयस्कों की तुलना में दोगुनी तेजी से सांस लेते हैं और उनके प्रतिरक्षा क्षमता में भी कमी होती है.

इस वजह से दिल्ली में हवा फिर से हो गई बहुत खराब, प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा