नई दिल्ली. 9 बार सांसद रहने वाले इस शख्स की छवि एक बिजनेस टायकून की भी है. यह वह शख्स है जिसे इंदिरा गांधी अपना तीसरा बेटा कहती थीं. उसके विपक्षी कटाक्ष करते हुए नारे लगाते थे कि इंदिरा के दो हाथ- संजय और कमलनाथ. दून स्कूल में संजय गांधी के साथ खेल-खेल में वह जो सपने देखता था, दिल्ली के पॉलिटिकल कॉरीडोर में वह उससे पूरा करने के लिए प्रयास करता था. दोस्ती निभाने का जज्बा ऐसा कि एक प्लान के तहत कोर्ट रूम में जज के ऊपर कागज का गेंद फेंकता है और जुर्माना भी नहीं चुकाता है ताकि उसे 7 दिन की जेल हो जाए और वह तिहाड़ में अपने दोस्त के पास पहुंच जाए. चुनाव प्रचार में आज जिस तरह जहाज-हेलीकॉप्टर से लेकर तकनीकी का प्रयोग किया जाता है, कहा जाता है कि सबसे पहले प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर और सैटेलाइट फोन का प्रयोग इसी शख्स ने किया था. हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की.

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 334 किमी दूर छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ के ऊपर इस बार कांग्रेस की चुनावी कश्ती पार लगाने की बड़ी जिम्मेदारी है. इसके पीछे एक बड़ा तर्क ये दिया जा रहा है कि यूपी के कानपुर में जन्म लिए कमलनाथ अपनी राजनैतिक पारी खेलने मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जाते हैं और फिर उसे कांग्रेस के लिए एक अजेय दुर्ग बना देते हैं तो वह राज्य में भी कांग्रेस की सत्ता वापसी करा सकते हैं. गांधी परिवार के साथ उनका रिश्ता ऐसा है कि इंदिरा से लेकर संजय, राजीव और सोनिया के बाद राहुल गांधी के भी वह उतना ही विश्वासपात्र हैं. संजय गांधी के साथ दोस्ती तो ऐसी थी कि वह तिहाड़ और बरेली जेल में भी साथ रहे. 17 बार जेल जा चुके कमलनाथ एक बार जेल में बिकनी किलर चार्ल्स शोभराज के पड़ोसी तक रह चुके हैं.

संजय गांधी के लिए जेल जाने वाला किस्सा
बिजनेस स्टैंडर्ड की पत्रकार मोनिका गुप्ता कमलनाथ का किस्सा A friend in need हेडिंग से लिखे गए आर्टिकल में लिखती हैं. साल 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद जब साल 1977 में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो संजय गांधी को जेल में डाल दिया गया. यह वह समय था जब पूरा गांधी परिवार हाशिए पर था और उस पर कई तरह के आरोप लगे थे. विकीलीक्स ने तो यहां तक खुलासा किया था कि उस दौरान इंदिरा के घर अमेरिकी जासूस तक पहुंच गया था. ऐसे में इंदिरा को जेल में बंद संजय की चिंता सताने लगी. कमलनाथ इसे भांप गए और एक नाटकीय घटनाक्रम के लिए वकील से बात की. एक योजना के तहत वह संजय मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में जज के ऊपर कागज का गेंद फेंक दिए. वह भीड़ में थे तो जज उन्हें यह करते नहीं देख पाए. ऐसे में कमलनाथ खुद ही हल्ला करने लगे. इस पूरी घटना से नाराज जज ने कमलनाथ के ऊपर 500 रुपये का जुर्माना लगा दिया. कमलनाथ ने जुर्माने की राशि अदा नहीं की और उन्हें 7 दिन के लिए जेल हो गई. इस तरह कमलनाथ अपने दोस्त संजय के पास तिहाड़ जेल पहुंच गए.
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छिंदवाड़ा की फिजा कैसे बदली
इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी अपनी सीट से भी हार गई थीं. इस दौरान भी छिंदवाड़ा से गार्गीशंकर मिश्र चुनाव जीतने में सफल रहे. इंदिरा का शौर्य कम हो चुका था और उनपर कई गंभीर आरोप लगे थे. ऐसे में पार्टी से उनकी पकड़ भी कमजोर हो गई थी. ऐसे दौर में गार्गीशंकर मिश्र एक बड़ी लाइन खींचने का प्रयास करने लगे. वह जिले के साथ-साथ प्रदेश और केंद्र के नेताओं से भी सही तरीके से पेश नहीं आते थे. इसकी शिकायत इंदिरा तक पहुंची तो उन्होंने छिंदवाड़ा से प्रत्याशी बदलने की बात शुरू की.

इंदिरा ने कहा- मेरा तीसरा बेटा
बुरे दौर में भी कांग्रेस से जीतने की वजह से गार्गीशंकर मिश्र खुद को बड़ा साबित करने में लगे थे. ऐसे में इंदिरा ने संजय के दोस्त कमलनाथ को छिंदवाड़ा चुनाव लड़ने के लिए भेजा. पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा हुई. ये कहा जाने लगा कि एक बाहरी आकर छिंदवाड़ा में जीत नहीं दर्ज कर सकता है. लेकिन कमलनाथ का प्रचार करने खुद इंदिरा छिंदवाड़ा पहुंची. एक रैली को संबोधित करते हुए इंदिरा ने कहा कि कमलनाथ उनके तीसरे बेटे हैं और वह अपने बेटे को छिंदवाड़ा को देकर जा रही हैं.

हेलीकॉप्टर और सैटेलाइट का सबसे पहले किया प्रयोग
कमलनाथ ने बचपन में दून स्कूल में संजय गांधी के साथ बिजनेस के जो सपने देखे थे, वह उसे पूरा करने के लिए आगे आए. कहा जाता है कि वह 23 कंपनियों के मालिक हैं और कई के सहयोगी भी हैं. कहा जाता है कि उनके बेटे नकुलनाथ और बकुलनाथ उनका बिजनेस संभालते हैं. एक किस्सा कहा जाता है कि राजनीति में प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर और सैटेलाइट फोन का सबसे पहले कमलनाथ ने ही प्रयोग किया था.

9 बार सांसद होने का रिकॉर्ड
चुनाव आयोग के आकंड़ों के मुताबिक. साल 2014 में कमलनाथ 9वीं बार सांसद बने हैं. ऐसे में उन्होंने माकपा के वासुदेव आचार्य और कांग्रेस के मणिक राव होदिया के 9 बार सांसद चुनाव जाने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है. वह7वीं, 8वीं, 9वीं, 10वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा के सदस्य रहे. बीच में वह 11 वीं 11वीं लोकसभा में सांसद नहीं थे. इस बार 16वीं लोकसभा में उन्हें 1,16,576 मतों से जीत मिली थी.

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विवादों में भी खूब रहें
इमरजेंसी के दिनों में संजय के साथ कमलनाथ पर भी कई आरोप लगे. इसके बाद साल 1984 में दिल्ली में हुए सिख दंगों में भी कमलनाथ के ऊपर आरोप लगा. बाद में साल 1996 में हवालाकांड में कमलनाथ का नाम आ गया, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया. ऐसे में कमलनाथ की पत्नी अलका कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरीं और चुनाव जीत गईं. लेकिन इस बीच कमलनाथ ने एक गलत स्टैंड ले लिया. एक साल बाद उन्होंने अपनी पत्नी से इस्तीफा दिलवाकर खुद चुनाव में उतर गए. इस बार उनके खिलाफ मैदान में उतरे राज्य के पूर्व सीएम सुंरलाल पटवा और कमलनाथ को हार का सामना करना पड़ा.

व्यक्तिगत जीवन
18 नवंबर 1946 को यूपी के कानपुर में जन्म कमलनाथ की शुरुआती पढ़ाई देहरादून के दून स्कूल में हुई. यहां वह संजय गांधी के जूनियर थे. इसके बाद वह उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज चले गए. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह फिर से संजय गांधी के संपर्क में आ गए और स्कूल के दिनों में देखे सपने को पूरा करने के लिए काम करने लगे. इसमें मारूती भी एक थी. साल 1979 में वह छिंदवाड़ा से सांसद बने और बीच में एक उपचुनाव हारने के बाद वह फिर से छिंदवाड़ा को अजेय दुर्ग बनाने में कामयाब हो गए. साल 1991 से 1994 तक वह केंद्र सरकार में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रहे. साल 1995-96 में केंद्रीय कपड़ा मंत्री, साल 2004 से 2009 तक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री, साल 2009 से 2011 तक केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री और साल 2011 से 2014 तक केंद्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्यमंत्री रहे. उन्हें पार्टी ने महासचिव भी बनाकर संगठन की जिम्मेदारी दी और कई राज्यों का प्रभारी बनाया.