
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर की बेटी इशिता सेंगर ने सोमवार को एक ओपन लेटर जारी किया. इस पत्र में उन्होंने अपने परिवार की मानसिक और शारीरिक स्थिति का बेहद दर्द बयां किया है. इशिता ने लिखा कि उनका परिवार पिछले आठ साल से चल रही इस कानूनी लड़ाई में पूरी तरह थक चुका है और डरा हुआ है. उन्होंने सोशल मीडिया पर मिलने वाली नफरत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ जीवित रहने के लिए भी बलात्कार और मौत की धमकियां दी जाती हैं. उनके अनुसार, ‘भाजपा विधायक की बेटी’ का लेबल उनसे उनकी गरिमा और बोलने का अधिकार छीन लेता है. इशिता ने आरोप लगाया कि उनके परिवार को हर दिन अपमानित और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होंने चुप्पी साधे रखी.
इशिता का यह पत्र उस समय आया जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें कुलदीप सेंगर की सजा निलंबित करने की बात कही गई थी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले की गंभीरता और पोक्सो (POCSO) कानून की बारीकियों को देखते हुए यह कदम उठाया.
To
The Hon’ble Authorities of the Republic of India,I am writing this letter as a daughter who is exhausted, frightened, and slowly losing faith, but still holding on to hope because there is nowhere else left to go.
For eight years, my family and I have waited. Quietly.…
— Dr Ishita Sengar (@IshitaSengar) December 29, 2025
इशिता ने अपने पत्र में लिखा कि उनके परिवार ने आठ साल तक इसलिए धैर्य रखा क्योंकि उन्हें भारत के संविधान पर भरोसा था. उन्होंने तर्क दिया कि देश में न्याय ‘शोर, हैशटैग या सार्वजनिक गुस्से’ पर निर्भर नहीं होना चाहिए. पत्र में यह भी कहा गया कि उनका सच इसलिए अनसुना रह गया क्योंकि वह लोगों के लिए ‘असुविधाजनक’ था, न कि इसलिए कि उनके पास तथ्यों की कमी थी.
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पहले, 23 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को बड़ी राहत दी थी. हाई कोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने का आदेश जारी किया था. कोर्ट का मानना था कि सेंगर दिसंबर 2019 से लगातार जेल में है और साढ़े सात साल की सजा काट चुका है. हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और दलील दी कि सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति था और उसने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को याद दिलाया कि सेंगर न केवल बलात्कार बल्कि पीड़िता के पिता की कस्टडी में हुई हत्या के लिए भी दोषी है.
फिलहाल, कुलदीप सेंगर जेल में ही रहेंगे. क्योंकि वह 10 साल की एक अन्य सजा भी काट रहा है. इशिता सेंगर का यह पत्र उस सामाजिक संघर्ष को दिखाता है जो एक हाई-प्रोफाइल अपराधी का परिवार पर्दे के पीछे झेलता है. उनके पत्र ने अब इस कानूनी और सामाजिक लड़ाई में एक नई बहस छेड़ दी है.
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