नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत द्वारा सोमवार को उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद बीजेपी से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर अदालत में ही रोने लगा. वह अपनी बहन के बगल में रोता दिखाई दिया. अदालत बुधवार को सजा का ऐलान करेगी. दिल्ली की कोर्ट ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव में 2017 में नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी ठहराया. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने हालांकि मामले में एक अन्य आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

अदालत ने मुख्य आरोपी सेंगर को आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी करार दिया है. जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने हालांकि, सह आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया. अदालत सजा पर बुधवार को दलीलें सुनेगी. पॉक्सो अधिनियम के तहत इस आरोप के लिए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.

अदालत सेंगर को बुधवार को सजा सुनाएगी. सेंगर को आईपीसी के तहत दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया है. सेंगर ने 2017 में एक युवती का अपहरण करने के बाद उससे बलात्कार किया था. उस समय युवती नाबालिग थी. यूपी की बांगरमऊ विधानसभा सीट से चौथी बार विधायक बने सेंगर को इस मामले के बाद अगस्त 2019 में बीजेपी से निष्कासित कर दिया गया था.

अदालत ने 9 अगस्त को विधायक सेंगर और सिंह के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, बलात्कार और पोक्सो कानून से संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे. बलात्कार मामले में बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों से जिरह हुई.

सेंगर पर आरोप लगाने वाली युवती की कार को 28 जुलाई में एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी. दुर्घटना में युवती की दो रिश्तेदार मारी गईं और उसके परिवार ने इसमें षड्यंत्र होने के आरोप लगाए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले में दर्ज सभी पांच मामलों को एक अगस्त को उत्तरप्रदेश में लखनऊ की अदालत से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करते हुए निर्देश दिया कि रोजाना आधार पर सुनवाई की जाए और इसे 45 दिनों के अंदर पूरा किया जाए. न्यायालय ने यह व्यवस्था पीड़िता द्वारा भारत के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए दी थी.

बलात्कार पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए दिल्‍ली स्थित एम्स अस्पताल में एक विशेष अदालत भी बनाई गई. पीड़िता को लखनऊ के एक अस्पताल से हवाई एंबुलेन्स के जरिये दिल्ली ला कर यहां भर्ती कराया गया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर युवती और उसके परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा दी गई है.