उन्नाव/लखनऊ: तेलंगाना में एक महिला पशु चिकित्सक को बलात्कार के बाद जिंदा जलाये जाने की वारदात पर देश का गुस्सा अभी थमा भी नहीं था कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव में गुरुवार तड़के एक कथित बलात्कार पीड़िता को आग के हवाले कर देने की खौफनाक घटना के बाद उसे एयरलिफ्ट कर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ले जाया गया है.

 

मंडल आयुक्त मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 90 फीसद तक झुलस चुकी 23 वर्षीय युवती को लखनऊ के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर बेहद नाजुक हालत के मद्देनजर उसे देर शाम एयरलिफ्ट कर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. दूसरी ओर राष्ट्रीय महिला आयोग ने वारदात का स्वत: संज्ञान लेते हुए इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह को नोटिस जारी कर उनसे रिपोर्ट तलब किया है. उन्नाव के पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर ने बताया कि जिले के बिहार थाना क्षेत्र की रहने वाली 23 वर्षीय युवती ने शिवम और शुभम नामक युवकों पर 12 दिसम्बर 2018 को बलात्कार करने का मुकदमा दर्ज कराया था. युवती मुकदमे की पैरवी के सिलसिले में रायबरेली रवाना होने के लिये सुबह करीब चार बजे बैसवारा रेलवे स्टेशन जा रही थी कि तभी रास्ते में बिहार—मौरांवा मार्ग पर शिवम और शुभम ने अपने साथियों की मदद से उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.


लखनऊ के मण्डलायुक्त मुकेश मेश्राम ने बताया कि करीब 90 फीसद तक जल चुकी लड़की को लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, मगर हालत बेहद नाजुक होने की वजह से उसे देर शाम एयरलिफ्ट करके दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया. पीड़िता का इल्जाम है कि आरोपी पक्ष मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव डाल रहा था और बात न मानने पर उसने इस वारदात को अंजाम दिया. लड़की ने उपजिलाधिकारी दयाशंकर पाठक को दिये गये बयान में शिवम और शुभम के साथियों रामकिशोर, हरिशंकर, और उमेश के नाम भी लिये हैं. इन सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है. हरिशंकर शुभम का पिता है. इस घटना ने हाल ही में तेलंगाना में एक महिला पशु चिकित्सक की सामूहिक बलात्कार के बाद जलाकर हत्या किये जाने की वारदात की याद दिला दी. प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद उन्नाव के थाना बिहार में हुई घटना का संज्ञान लेते हुए पीड़िता को सरकारी खर्च पर हर सम्भव चिकित्सा सुविधा देने और आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिये हैं. मुख्यमंत्री ने लखनऊ के मण्डलायुक्त और पुलिस महानिरीक्षक को तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तलब की है.

राष्ट्रीय महिला आयोग ने यूपी डीजीपी को भेजा नोटिस
इस बीच, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओम प्रकाश सिंह को नोटिस भेज कर कहा कि महिलाओं के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए कई कानून बनाने के बावजूद राज्य में महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों को लेकर आयोग व्यथित है. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक है कि राज्य सरकार इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट सौंपे. उधर, इस घटना के चश्मदीद रहे रवीन्द्र ने संवाददाताओं को बताया कि युवती अधजली हालत में कुछ दूर तक बदहवास दौड़कर आयी और मदद की गुहार की. वह गम्भीर रूप से झुलसी थी. इस पर उन्होंने पुलिस को फोन किया. युवती ने अपने साथ हुई वारदात के बारे में पुलिस को खुद बताया.

दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जाएगी
पुलिस महानिरीक्षक (कानून—व्यवस्था) प्रवीण कुमार ने लखनऊ में संवाददाताओं को बताया कि इस मामले में बेहद तत्परता से कार्रवाई की जाएगी और प्रकरण का फास्ट ट्रैक अभियोजन करके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जाएगी. इस बीच, मामले की जांच के लिये फोरेंसिक टीम ने उन्नाव में घटनास्थल का दौरा करके साक्ष्य जुटाये. इस बीच, प्रदेश पुलिस ने ट्वीट कर बताया कि पीड़िता ने शादी का झांसा देकर 19 जनवरी 2018 से 12 दिसंबर 2018 के बीच दुष्कर्म करने के संबंध में एक मुकदमा पंजीकृत कराया था और इस मामले में जेल भेजे गये आरोपी शिवम की गत 25 नवंबर को जमानत हुई थी. विपक्ष ने इस घटना पर तल्ख रुख अख्तियार करते हुए सरकार की कड़ी आलोचना की है.

सपा ने मांगा सीएम योगी का इस्तीफा
मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का इस्तीफा मांगते हुए कहा कि न्यायालय से गुहार है कि वह इस घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता के समुचित उपचार और सुरक्षा की तत्काल व्यवस्था के निर्देश दे. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर कहा कि कल भाजपा सरकार का बयान आया था कि उत्तर प्रदेश में सब ठीक है लेकिन हालात बिल्कुल उलट हैं. उन्होंने कहा कि क़ानून व्यवस्था के बारे में झूठी बयानबाज़ी और झूठा प्रचार करने के लिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार ही जिम्मेदार है.

पीड़िता से मिलने गये कांग्रेस और सपा के प्रतिनिधिमण्डल को रोका
इस बीच, अस्पताल में पीड़िता से मिलने गये कांग्रेस और सपा के प्रतिनिधिमण्डल को पुलिस ने अंदर जाने से रोक दिया और साथ ही मीडिया को भी परिजनों से नहीं मिलने दिया गया. विधानपरिषद में सपा और विपक्ष के नेता अहमद हसन ने कहा कि उनकी पार्टी पीड़िता की मदद करना चाहती है मगर हमें उसके परिजनों से मिलने नहीं दिया जा रहा है और सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिये.