नई दिल्ली: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने देश में बाढ़ की भयावह स्थिति के लिए अनियोजित शहरीकरण को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा की देश के कई हिस्सों में बाढ़ के कारण जो स्थिति बनी हुई है उसकी वजह अनियोजित शहरीकरण है, न कि जलवायु परिवर्तन. लोगों को ये ‘‘मुद्दा विरासत’’ में मिला है, जिसे सरकार अपने स्मार्ट सिटी कार्यक्रम के जरिए ठीक कर रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि शहर को बेहतर ढंग से नियोजित होने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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पर्यावरण मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि यह कहना विज्ञान नहीं है कि ये (बाढ़) जलवायु परिवर्तन के चलते हुआ. बल्कि सच ये है कि देश में अनियोजित ढंग से विकास हुआ है. हमने समुचित निकास प्रणाली सुनिश्चित करते हुए चंड़ीगढ़ और फिर गांधीनगर की योजना बनाई. दूसरे शहरों में ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने कहा, ‘‘अनियोजित विकास से चिंताएं बढ़ रही हैं, इसलिए शहरी नियोजन बेहद महत्वपूर्ण है.’’

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वहीं आधिकारिक आंकड़ों को मानें तो इस मानसून सत्र के दौरान बारिश और बाढ़ के कारण करीब 1900 लोगों की जान गई, जबकि 46 लोग लापता हैं. इस तरह के आपदा से 22 राज्यों में 25 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. जावड़ेकर का कहना है कि चंड़ीगढ़ में भवन निर्माण के समय जो नियम लागू होते हैं, वही नियम दूसरे शहरों में भी भवन निर्माण के समय लागू होने चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘ये विरासत से मिली समस्या है. लुटियंस दिल्ली 130 साल पुरानी है. इसके बाद चंड़ीगढ़ बना. चंड़ीगढ़ के बाद दूसरे शहर का निर्माण हुआ. चंड़ीगढ़ को बनाने के लिए जिन नियमों का पालन किया गया, उन्हें दूसरे शहर बनाते समय भी लागू करना चाहिए था.’’ मंत्री ने कहा, ‘‘दुर्भाग्य से हमने वह अवसर खो दिया. महत्वपूर्ण लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया.’’

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इसके अलावा जावड़ेकर ने कहा कि मोदी सरकार अब अपने स्मार्ट सिटी कार्यक्रम के तहत विकास के अन्य उपायों के माध्यम से अनियोजित विकास की समस्या का समाधान कर रही है. पर्यावरण मंत्री ने अभी हाल ही में आए जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट के अंतर पर सरकारी पैनल के नतीजों को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने के चलते 2100 तक भारत के मुंबई जैसे शहर और अंडमान-निकोबार जैसे द्वीप क्रमिक रूप से उजड़ जाएंगे.