कौन हैं पवन पांडेय? जिन्हें अखिलेश यादव ने बनाया अयोध्या का सपा उम्मीदवार, जानें कितनी है नेटवर्थ
पवन पांडेय मौजूदा समय में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर BJP सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर हमलावर हैं. वह इस मुद्दे को लेकर लगातार राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सपा की तरफ से मोर्चा संभाले हुए हैं.
पवन पांडेय ने साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अयोध्या (फैजाबाद) सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. उन्हें अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है (ANI)
- UP में लोकसभा की 80 और विधानसभा की 403 सीटें
- 2022 के चुनाव में 273 सीटों के साथ बनी NDA सरकार
- अखिलेश की समाजवादी पार्टी को मिली थी 111 सीटें
- चुनाव में OBC, दलित, मुस्लिम और सवर्ण वोट बैंक अहम
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर अगले साल होने वाला चुनाव सिर्फ राज्य की सत्ता तय नहीं करेगा, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा भी तय करेगा. इसलिए BJP, समाजवादी पार्टी, BSP और उभरते क्षेत्रीय दल सभी अपने-अपने सामाजिक समीकरण साधने में जुटे हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी समाजवादी पार्टी ने अपना सियासी दांव अभी से चलना शुरू कर दिया है. सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव से करीब 300 दिन पहले पहला कैंडिडेट घोषित कर दिया है. लखनऊ में पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर आयोजित 'ब्राह्मण सम्मेलन' (प्रबुद्ध सम्मेलन) में अखिलेश यादव ने पूर्व मंत्री तेज नारायण उर्फ पवन पांडेय को अयोध्या विधानसभा सीट का उम्मीदवार घोषित किया है. यूपी में अगले साल मार्च-अप्रैल में चुनाव होने हैं.
अखिलेश यादव ने भरे मंच से दावा किया कि पवन पांडेय इस बार अयोध्या विधानसभा सीट से भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे.आइए जानते हैं कौन हैं पवन पांडेय? अखिलेश यादव ने उन्हें अयोध्या सीट से ही क्यों बनाया उम्मीदवार? अब तक कैसा रहा पवन पांडेय का पॉलिटिकल करियर और कितनी है नेटवर्थ:-
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पवन पांडेय कौन हैं?
- तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्य मंत्री हैं. वह अखिलेश यादव के बेहद करीबी और उनकी कोर टीम के सदस्य माने जाते हैं.
- पवन पांडेय के पॉलिटिकल करियर की शुरुआत 1998 में छात्र राजनीति से हुई. इसी दौरान उनका जुड़ाव समाजवादी आंदोलन के संस्थापक नेता मुलायम सिंह यादव से हुआ. फिर साल 1999 से वह अखिलेश यादव के साथ सक्रिय रूप से जुड़ गए.
- वह साल 2004 में लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ उपाध्यक्ष भी निर्वाचित हुए थे. 2007 में छात्र हितों से जुड़े आंदोलन के दौरान उन्हें जेल भी जाना पड़ा.
- पवन पांडेय ने साल 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अयोध्या (फैजाबाद) सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. उन्होंने BJP के लल्लू सिंह को हराया था और पहली दफा विधायक बनकर विधानसभा में बैठे थे.
- अखिलेश यादव सरकार (2012-2017) के दौरान पवन पांडेय को मनोरंजन कर राज्य मंत्री बनाया गया था. बाद में उन्होंने वन राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली.
- विधायक रहते हुए उन्होंने सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और नगर विकास जैसे मुद्दों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया.
अयोध्या से ही क्यों बनाया गया उम्मीदवार?
अयोध्या विधानसभा सीट धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. अयोध्या जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं. इनमें दरियाबाद, रुदौली, मिल्कीपुर, बीकापुर और अयोध्या शामिल हैं. राम मंदिर की वजह से अयोध्या विधानसभा सीट का राजनीतिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है. बीते कुछ दिनों से राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी और BJP एक-दूसरे पर हमलावर है. चढ़ावा चोरी का मामला भी पहली बार सपा और अखिलेश यादव ने ही उजागर किया था. इसलिए समाजवाजी पार्टी इस मुद्दे पर भुनाना भी चाहती है.
पवन पांडेय मौजूदा समय में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर BJP सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर हमलावर हैं. वह इस मुद्दे को लेकर लगातार राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सपा की तरफ से मोर्चा संभाले हुए हैं. ऐसे में इस सीट पर बतौर उम्मीदवार पवन पांडेय की घोषणा को सपा की महत्वपूर्ण चुनावी रणनीति माना जा रहा है.
वहीं, ब्राह्मण सम्मेलन के मंच से उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर अखिलेश यादव ने यह संकेत भी दिया है कि वह 2027 के चुनाव को लेकर सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय रणनीति पर तेजी से काम कर रही है.
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कितनी है नेटवर्थ?
पवन पांडेय ने आखिरी बार 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा था. इसलिए 2012 के चुनावी हलफनामे के आधार पर उनकी नेटवर्थ 13.56 लाख रुपये है.पवन पांडेय के पास 2017-18 में 12.49 लाख, उनकी पत्नी के पास 2.94 लाख, 2018-19 में पवन के पास 5.95 लाख और पत्नी के पास 4.50 लाख, 2019-20 में पवन के पास 2.63 लाख और पत्नी के पास 5.10 लाख, 2020-21 में पवन के पास 2.51 लाख और पत्नी के पास 4.96 लाख, 2021-22 में पवन के पास 3.01 लाख और पत्नी के पास 4.89 लाख का इनकम टैक्स दाखिल है.
कितनी संपत्ति?
चल संपत्तियों के मामले में पवन पांडेय के तीन बैंक खातों में 4 लाख 23 हजार 190 रुपए जमा हैं. 8 लाख 48 हजार 34 रुपये की दो पॉलिसी, 70 हजार के जेवरात समेत कुल 13 लाख 56 हजार 224 की संपत्ति है. वहीं, पत्नी के पास 34905 जमा, 8 लाख 93 हजार के सोने चांदी के जेवरात समेत कुल 9 लाख 39 हजार 905 की संपत्ति है. हालांकि, 10 साल में ये संपत्ति काफी बढ़ गई होगी. इसकी सटीक जानकारी जब पवन पांडेय 2027 के चुनाव के लिए नॉमिनेशन फाइल करेंगे, तब मिल पाएगी.
कितने केस दर्ज?
पवन पांडेय के खिलाफ कुल 7 मुकदमे विचाराधीन हैं. ये मुकदमें लखनऊ के थाना हसनगंज और अयोध्या जिले के नगर कोतवाली में बलबा, आगजनी, गालीगलौज, धमकी, सरकारी कार्य में बाधा, जानलेवा हमला, निषेधाज्ञा का उल्लंघन और आचार संहिता उल्लंघन के हैं.
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