ओवैसी पर सपा की दो टूक, अनुराग भदौरिया बोले- जनता जानती है कौन जोड़ता है और कौन तोड़ता है

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:June 16, 2026 12:36 AM IST

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 चुनाव को लेकर हलचल अभी से तेज हो गई है. कांग्रेस संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी है, जबकि समाजवादी पार्टी ने ओवैसी को लेकर सख्त रुख दिखाया है.

SP on Asaduddin Owaisi: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Elections 2026) भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां तैयार करनी शुरू कर दी हैं. इसी बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों ने विपक्षी एकता और संभावित गठबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

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एक टीवी डिबेट के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने संकेत दिया कि पार्टी आगामी चुनाव के लिए व्यापक गठबंधन की संभावनाओं पर विचार कर रही है. चर्चा में ये भी सामने आया कि कांग्रेस दलित नेता चंद्रशेखर आजाद से लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी तक विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ संभावित तालमेल की संभावनाएं तलाश रही है.

समाजवादी पार्टी का ओवैसी पर तंज

हालांकि, ओवैसी के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी का रुख काफी स्पष्ट दिखाई दिया. डिबेट में सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा कि उनकी पार्टी का लक्ष्य 2027 तक उत्तर प्रदेश में 'रामराज' जैसी व्यवस्था स्थापित करना है और उम्मीदवार चयन का आधार केवल जीतने की क्षमता होगी.

ओवैसी के चुनाव लड़ने की संभावना पर सवाल पूछे जाने पर भदौरिया ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ नेता केवल चुनाव के समय ही सक्रिय दिखाई देते हैं और जनता उनके राजनीतिक उद्देश्यों को अच्छी तरह समझती है. उन्होंने दावा किया कि ऐसे नेताओं को प्रदेश की जनता ज्यादा महत्व नहीं देती और मतदाता ये तय कर चुके हैं कि कौन समाज को जोड़ने की राजनीति करता है और कौन विभाजन की.

सपा प्रवक्ता ने ये भी कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य एजेंडा उत्तर प्रदेश को विकास के नए स्तर पर ले जाना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता अब केवल नारों से प्रभावित नहीं होती, बल्कि विकास और सुशासन के आधार पर फैसला करती है. दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से गठबंधन को लेकर दिए गए संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है. माना जा रहा है कि पार्टी 2027 के चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से साधने की कोशिश कर रही है.

अगर विपक्षी दलों के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर सहमति नहीं बनती है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है. वहीं, ओवैसी की संभावित सक्रियता को लेकर भी चर्चा जारी है कि उनका प्रभाव किन सीटों पर पड़ सकता है और इससे विपक्षी वोटों का गणित किस तरह प्रभावित होगा. फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की लड़ाई का माहौल बनने लगा है. कांग्रेस अपने सहयोगियों की तलाश में जुटी है, समाजवादी पार्टी अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहती है और बीजेपी सत्ता बरकरार रखने की रणनीति बना रही है.

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