यूपी में बदल गए सरकारी नौकरी के नियम, सीएम योगी ने दी मंजूरी, जानिए क्या हुआ बदलाव?

Written By: Gaurav Barar Updated by: Gaurav Barar
Updated Date:March 11, 2026 10:51 AM IST

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों के लिए 1956 से चली आ रही आचरण नियमावली में संशोधन किया गया है.

UP News: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई.

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इन संशोधनों का सीधा असर लाखों सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों और संपत्ति के विवरण पर पड़ेगा. इसके साथ ही, कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 और कांशीराम आवास योजना को लेकर भी जनहितकारी निर्णय लिए हैं.

सरकारी कर्मचारियों के लिए कड़े हुए नियम

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सरकार ने दशकों पुरानी आचरण नियमावली के नियम-21 और नियम-24 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं. इन बदलावों के पीछे सरकार का तर्क है कि आज के दौर में निवेश के साधन बदल गए हैं, इसलिए नियमों का आधुनिक होना अनिवार्य है.

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश पर नजर

संशोधित नियम-21 के अनुसार, अब यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने मूल वेतन के 6 महीने से अधिक की राशि शेयर बाजार, स्टॉक या म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय साधनों में निवेश करता है, तो उसे इसकी लिखित जानकारी अपने विभाग के सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी. इससे पहले यह व्यवस्था इतनी स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब निवेश के बड़े आंकड़ों को छिपाना नामुमकिन होगा.

चल संपत्ति की खरीद के बदले नियम

सरकार ने नियम-24 में बदलाव कर कर्मचारियों को थोड़ी राहत भी दी है और सीमा को स्पष्ट भी किया है. अब यदि कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति जैसे- कार, महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स या ज्वेलरी, खरीदता है, तो उसे इसकी सूचना देनी होगी. पहले यह सीमा केवल एक महीने के वेतन के बराबर थी.

अचल संपत्ति का वार्षिक विवरण अनिवार्य

अचल संपत्ति जैसे- जमीन, मकान, फ्लैट, के मामले में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है. अब तक कर्मचारियों को हर 5 साल में एक बार अपनी अचल संपत्ति का ब्यौरा देना होता था, जिसे अब बदलकर प्रतिवर्ष कर दिया गया है. यानी अब हर साल कर्मचारियों को अपनी संपत्तियों का नया हिसाब-किताब सरकार को सौंपना होगा.

घर बनाना हुआ आसान

कैबिनेट ने मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS/LIG) के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 की नई नीति को हरी झंडी दे दी है. इस योजना का लक्ष्य शहरी गरीबों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है. योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को घर बनाने के लिए कुल 2.50 लाख रुपये की मदद मिलेगी. इसमें 1.50 लाख रुपये केंद्र सरकार और 1 लाख रुपये राज्य सरकार की ओर से दिए जाएंगे.

डेवलपर्स को प्रोत्साहन

निजी डेवलपर्स को इस योजना से जोड़ने के लिए सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, मानचित्र स्वीकृति शुल्क और बाहरी विकास शुल्क में भारी छूट देने का फैसला किया है. इसके अलावा शहरों में काम करने वाले मजदूरों और प्रवासियों के लिए किफायती किराया आवास मॉडल को मंजूरी दी गई है, जिसका संचालन निजी या सार्वजनिक संस्थाएं करेंगी.

अवैध कब्जों पर चलेगा डंडा

कैबिनेट ने कांशीराम आवास योजना के तहत बने मकानों की स्थिति सुधारने के लिए भी कड़ा रुख अपनाया है. प्रदेश भर से मिल रही अवैध कब्जों की शिकायतों को देखते हुए सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, जिन आवासों पर अनधिकृत कब्जे पाए जाएंगे, उन्हें तुरंत खाली कराया जाएगा. इसके बाद उन मकानों की मरम्मत और रंगाई-पुताई कराकर उन्हें पुनः पात्र दलित परिवारों को आवंटित किया जाएगा.

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