लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले कई दिनों से हुई लगातार बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं. नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे दर्जनों गांव बाढ़ से घिर गए हैं. अयोध्या जिले में सरयू नदी का जलस्तर चेतावनी का निशान पार कर गया है. नदी का जलस्तर सुबह 91़ 86 मीटर दर्ज किया गया, जिससे तटवर्ती इलाकों में हड़कंप मच गया है. स्थानीय लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है. सबसे ज्यादा खराब स्थिति बहराइच की है. वहां नेपाल में हो रही बारिश का असर देखा जा रहा है. सरयू नदी उफान पर है. जिले के शिवपुर ब्लॉक के 24 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं. मिहीपुरवा के तीन गांवों में पानी घुस गया है. घाघरा भी एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है. बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है. एसडीएम महसी ने तटवर्ती गांवों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया है.

बलरामपुर में बारिश से पहाड़ी नाले में बाढ़ आ गई है. जिले के 30 से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं. राप्ती नदी खतरे के निशान 103़ 620 से 88 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. तुलसीपुर-गौरा मार्ग सहित कई प्रमुख मार्गो पर आवागमन बाधित है. कुछ स्थलों पर नौका लगाकर ग्रामीणों के आवागमन की व्यवस्था की गई है. बाराबंकी में घाघरा नदी का जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है. नदी की कटान रामनगर क्षेत्र के कचनापुर, कोरिनपुरवा, जियनपुरवा, सिरौलीगौसपुर के ग्राम टेपरा व तेलियानी में हो रही है. श्रावस्ती में राप्ती नदी खतरे के निशान से पांच सेमी ऊपर बह रही है. कई अन्य प्रमुख रास्तों पर आवागमन ठप हो गया है.

सरयू नदी की एक शाखा शहर से सटकर बहती है. जिले में तीन दिनों से हो रही तेज वर्षा से नदी का जलस्तर बढ़ गया है. इस कारण सदर तहसील क्षेत्र के शेखदहीर, पिपरिया महिपालसिंह, आगापुरवा, सिसई हैदर, मुल्लापुरवा, सराय मेहराबाद, यादवपुर, त्रिवेदीपुरवा सहित 16 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. लगभग 28 हजार की आबादी प्रभावित है. सरयू नदी के उफान की सूचना पाकर उपजिलाधिकारी कीर्ति प्रकाश भारती ने राजस्वकर्मियों की टीम के साथ नौका से प्रभावित गांवों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया. हैदर सिसई, सराय मेहराबाद और आगापुरवा गांव में नौका से पहुंचकर एसडीएम ने ग्रामीणों के साथ बातचीत कर समस्याएं सुनीं और मदद का भरोसा दिलाया.

एल्गिन ब्रिज के सहायक अभियंता आशुतोष कुमार ने बताया, “नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है. खतरे का निशान 106़ 07 मीटर है. लेकिन अभी नदी खतरे के निशान से 52 सेंटीमीटर नीचे बह रही है. लेकिन अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो नदी लाल निशान पार कर सकती है.” इन हालात में घाघरा का पानी खतरे के निशान को एक-दो दिन में पार कर सकता है. नदी में उफान बढ़ने से तराई के लोगों में हड़कंप मच गया है. तटवर्ती कमियार, परसावल, नैपुरा, बांसगांव, मांझा रायपुर आदि गांवों के लोग डर के कारण सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं. ये गांव सबसे पहले बाढ़ की चपेट में आते हैं. इसलिए ग्रामीण गृहस्थी के सामानों के साथ अपने मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे हैं.

वहीं, गोरखपुर के देवरिया में भारी बारिश के कारण जिलाधिकारी और जिला आबकारी अधिकारी के कार्यालय क्षेत्र में पानी भर गया है. लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. गंगा सहित कई सहायक नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने लगा है. मात्र एक ही दिन में वाराणसी में गंगा का जलस्तर 0़ 7 मीटर बढ़ गया. इसके बाद चेतावनी के स्तर से मात्र 10़ 60 मीटर ही गंगा रह गई है. आने वाली स्थिति को भांपते हुए घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है.

गोमती नदी में बाढ़ के कारण लखनऊ से सटे बीकेटी और इटौंजा के लगभग 12 गांव प्रभावित होने के कगार पर हैं. इसमे जमखनवां, जमखनवां का पुरवा, दुघरा, अचलपुर, अकरडिया खुर्द, अकरडिया कला, लाशा, सुल्तानपुर, बहादुरपुर, मल्लाहन खेड़ा, चंद्रिका देवी तीर्थस्थल आदि है. प्रशासन ने हालांकि जमखनवां और अकरडिया कला में 35 नौका की व्यवस्था करने का दावा किया है. इसके अलावा आठ लेखपाल और तीन कानूनगो भी जलस्तर की निगरानी के लिए लगाए गए हैं.

एसडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने बताया कि “दुघरा गांव के आस-पास क्षेत्र में गोमती नदी का पानी बढ़ने लगा है. मैंने तहसीलदार को बाढ़ग्रस्त गांवों में भेजा है. ग्रामीणों को किसी तरह परेशान होने की जरूरत नहीं है. प्रशासन हर तरीके से उनकी मदद करेगा.” आपदा प्रबंधन कार्यालय ने कहा, “राहत एवं बचाव कार्य के लिए हमारी टीमें जा रही हैं. हर जगह का मुयाना किया जा रहा है. जहां कमी देखी जा रही है, उसे ठीक करने का प्रयास हो रहा है. खासकर जहां नदियां उफान पर हैं, वहां जल्द से जल्द राहत पहुचाई जा रही है.”