NCRB report 2024 Uttar Pradesh: किसी भी राज्य की कानून-व्यवस्था का असली पैमाना केवल पुलिस बल की संख्या या थानों की गिनती नहीं होता. असली सवाल ये होता है कि आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करता है. क्या वह रात में बिना डर सो सकता है? क्या उसे भरोसा है कि शिकायत करने पर न्याय मिलेगा?
इसी नजरिए से देखें तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 रिपोर्ट उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर एक अलग तस्वीर पेश करती है. लंबे समय तक अपराध और माफिया राजनीति के लिए चर्चा में रहने वाला राज्य अब अपराध नियंत्रण और सख्त प्रशासन की वजह से नई पहचान बनाने की कोशिश करता दिख रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से नीचे बताई गई है. राज्य की आबादी देश में सबसे ज्यादा होने के बावजूद कुल अपराधों के मामले में इसकी स्थिति दूसरों के मुकाबले ठीक रही.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल कुल अपराध संख्या से स्थिति नहीं समझी जा सकती. प्रति एक लाख आबादी पर अपराध यानी ‘क्राइम रेट’ को ज्यादा भरोसेमंद पैमाना माना जाता है. इसी आधार पर उत्तर प्रदेश की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर दिखाई गई है.
फिरौती के लिए अपहरण और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में राज्य का प्रदर्शन बेहतर बताया गया है. ये इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि ऐसे अपराध सीधे तौर पर समाज में भय का माहौल बनाते हैं.
पूर्व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलता और प्रशासन सख्ती दिखाता है, तभी संगठित अपराध कमजोर पड़ता है. पिछले कुछ वर्षों में इसी दिशा में बदलाव देखने को मिला है.
रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा देना रहा. उत्तर प्रदेश में ये दर काफी ऊंची बताई गई है, जिसे प्रशासन अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहा है. किसी भी मामले में दोषसिद्धि तभी संभव होती है जब पुलिस जांच मजबूत हो, सबूत सही तरीके से जुटाए जाएं और कोर्ट में प्रभावी तरीके से पेश किए जाएं.
राज्य सरकार लगातार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात करती रही है. अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की रणनीति को प्रशासनिक सुधार का हिस्सा बताया जा रहा है.
कानून-व्यवस्था में सुधार का असर निवेश और उद्योगों पर भी पड़ता है. जब किसी राज्य में सुरक्षा का माहौल बनता है, तो वहां व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने लगते हैं.
लेखक एके जैन, उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक हैं.
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