लोकसभा में अगस्तावेस्टलैंड पर चर्चा के दौरान रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि अगस्ता को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को बदला गया। साथ ही बाहर टेस्ट करने की बात को स्वीकार गया। उन्होंने एक बार फिर कहा कि वह चॉपर डील में इस बात का पता लगाकर रहेंगे कि रिश्वत का पैसा कहां और किसके पास गया। यही नहीं, उन्होंने कहा कि जो काम बोफोर्स के समय नहीं हो सका, वह अगस्ता मामले में होगा।

पर्रिकर ने कहा टेंडर इटली की कंपनी को दिया गया, लेकिन टेंडर भरा यूके की कंपनी ने। यानी टेंडर दूसरी कंपनी को दिया गया और टेंडर कोट दूसरी कंपनी ने भरा था। इस कंपनी के पास उत्पाद निर्माण की सुविधा नहीं थी। यह केवल पीआर का काम कर रही थी। इसने बाद में टेंडर इटली की कंपनी को दिया। इसके पेपर इटली की कोर्ट से मिल गए हैं। यह भी पढ़े-अगस्ता घोटाला:ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा सोनिया गांधी शेरनी हैं, उसे खदेड़ोगे तो महंगा पड़ेगा

ज्ञात हो कि कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग को लेकर आज लोकसभा से वॉकआउट किया। इसके बावजूद मनोहर पर्रिकर का बयान जारी रहा। अगस्ता केस पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने एक बार फिर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘ये लोग भाग्यशाली हैं, लेकिन मैं अभी भी इटली कोर्ट के फैसले का अनुवाद कर रहा हूं। इसमें कोई शक नहीं है कि त्यागी और खेतान ने बहती गंगा में हाथ धो लिए लेकिन ये गंगा कहां जा रही है मैं वो ढूढ़ रहा हूं। कांग्रेस को चिंता इसलिए हो रही है, क्योंकि इन्हें मालूम है कि गंगा कहां जा रही है.

-फिर से चर्चा में ‘गंगा’
दूसरी ओर, देश की पवित्र नदी गंगा एक बार फिर चर्चा में है। आम तौर पर मोदी के स्वच्छता अभि‍यान को लेकर सुर्ख‍ियां बटोरने वाली गंगा इस बार सियासी बयानबाजी के जुमला बनकर रह गई है। शुक्रवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च के दौरान जहां एक ओर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस की तुलना ‘बहती गंगा’ से की, वहीं लोकसभा में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने अगस्ता केस में आरोपियों पर उसी ‘गंगा’ में हाथ धोने की बात कही। यह भी पढ़े-अगस्ता वेस्टलैंड सौदा: रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा अदृश्य हाथ ने जल्द जांच करने से रोका

गौरतलब है कि 2011 नवंबर में इटली में केस दर्ज हुआ। फरवरी 2012 में सरकार ने एम्बैसी को लिखा कि मामला क्या है, लेकिन तत्कालीन सरकार ने कंपनी को कोई पत्र नहीं लिखा। 2005 में यूपीए सरकार ने एक अखबार की रिपोर्ट पर छह कंपनी को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया था, लेकिन यहां पर कुछ नहीं किया। दिसंबर 2012 को 3 हेलीकॉप्टर आए।

15 फरवरी 2013 को पहला नोटिस दिया। यह भी तब जब कंपनी ने भारत सरकार को नोटिस भेजा। 4 दिसंबर 2013 को कंपनी ने भारत में अर्बिट्रेटर अपाइंट करने की बात कही। इसके बाद सरकार को अर्बिट्रेटर नियुक्त करना था और इससे पहले कान्ट्रैक्ट समाप्त करने का नियम है। तब सरकार को यह करना पड़ा। बैंक गारंटी रिवोक हुई। इसकी भी पूरी रकम नहीं दी गई। परफॉर्मेंस फेलुयर का पैसा भी नहीं मिला। रक्षा मंत्रालय ने सम्बद्ध कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने तथा हर्जाने की वूसली की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

पर्रिकर ने एक प्रश्न के जवाब में कहा, 1994 में इस खरीद की प्रक्रिया आरंभ हुई। 1.8 मीटर ऊंचाई बढ़ाने का काम कांग्रेस की यूपीए सरकार ने किया। एनएसए की बैठक में 9 मई 2005 को यूपीए सरकार ने ऊंचाई बढ़ाने का काम किया। यह भी पढ़े-अगस्ता वेस्टलैंड पर खुलासे के लिए भाजपा का स्वागत: सोनिया

3 जुलाई 2014 को एयरपोर्ट 2 ऑफिस जहां सब रिकॉर्ड रखे जाते हैं। वहां आग लग गई। तमाम फाइलें जल के खाक हुईं। आग की वजह भी सामने आएगी। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर भारतीय मौसम के अनुसार ठीक साबित नहीं हुआ। पर्रिकर ने बताया कि इसके टेस्ट में तमाम खामियां उजागर हुईं। इस वजह से इसके ट्रायल भारत में नहीं हुए।

कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोनिया गांधी का जमकर बचाव करते हुए मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला।सिंधिया पूरी तरह आक्रामक नजर आये और उन्होंने कहा कि जब भी सोनिया गांधी को नाम आता है तो इन लोगों को खुजली होने लगती है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी शेरनी है, शेरनी को खदेड़ोगे को बहुत दिक्कत होगी। इटली की कोर्ट के फैसले पर जिसमें एपी का जिक्र किया गया है उन्होंने कहा कि एपी का मतलब आनंदीबेन पटेल भी होता है। ऐसे में ऐसे तथ्य जो इंटरनेट से लिये गये हैं उस आधार पर आरोप लगाना शर्मनाक है।