
Rishabh Kumar
ऋषभ कुमार पाण्डेय डिजिटल मीडिया और न्यूज इंडस्ट्री में एक साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं. वे मई 2024 से Zee Media समूह के साथ जुड़े हैं. यहां ... और पढ़ें
यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की चर्चाओं के बीच पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने बड़ी सफाई दी है संगठन ने कहा है कि आम लोगों के लिए यूपीआई पहले की तरह पूरी तरह बिना किसी शुल्क के चलता रहेगा यानी अगर आप किसी दुकान, दोस्त या दूसरे व्यक्ति को यूपीआई से पैसे भेजते हैं, तो आपको कोई नया चार्ज नहीं देना होगा साथ ही छोटे व्यापारियों को भी यूपीआई पेमेंट लेने पर किसी तरह की फीस नहीं देनी पड़ेगी इससे करोड़ों यूपीआई यूजर्स और छोटे कारोबारियों को राहत मिली है
हाल के दिनों में यूपीआई पर एमडीआर लगाने को लेकर कई तरह की खबरें सामने आई थीं इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि क्या अब यूपीआई से भुगतान करना महंगा हो जाएगा इस पर पीसीआई ने साफ कहा कि यह चर्चा ग्राहकों से पैसा लेने को लेकर नहीं है असल मुद्दा इतना बड़ा डिजिटल सिस्टम चलाने और उसे आगे बेहतर बनाने का है हर महीने यूपीआई पर अरबों ट्रांजैक्शन होते हैं ऐसे में इस पूरे नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर बात चल रही है
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा कि छोटे दुकानदारों, ठेला लगाने वालों, किराना स्टोर और छोटे कारोबारियों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है उन्हें यूपीआई से पेमेंट लेने पर किसी तरह का एमडीआर नहीं देना होगा यूपीआई की शुरुआत ही इस सोच के साथ की गई थी कि छोटे कारोबार भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के डिजिटल पेमेंट अपना सकें इसलिए छोटे व्यापारियों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है
साल 2016 में शुरू हुआ यूपीआई आज भारत का सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म बन चुका है इसकी मदद से लोग कुछ ही सेकंड में पैसे भेज और प्राप्त कर सकते हैं इससे नकद लेनदेन कम हुआ है और छोटे कारोबारियों को भी बड़ा फायदा मिला है आज लाखों दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे व्यापारी आसानी से यूपीआई से भुगतान स्वीकार कर रहे हैं इससे डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है और ज्यादा लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं
पीसीआई का कहना है कि यूपीआई अब दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम में शामिल हो चुका है इसके साथ ही तकनीकी सुधार, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और पूरे नेटवर्क को मजबूत बनाए रखने की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है पिछले कई वर्षों में बैंक, फिनटेक कंपनियां, एनपीसीआई और भारतीय रिजर्व बैंक ने मिलकर इस सिस्टम को मजबूत बनाने में बड़ा निवेश किया है संगठन ने दोहराया कि भविष्य में भी कोशिश यही रहेगी कि आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े
(इनपुट: IANS)
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