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देश के किसानों से सबसे बड़ी 'लूट', ZEE NEWS के खुफिया कैमरे में कैद हुए 20 हजार करोड़ रुपये के लुटेरे
Urea Scam India: देश के किसानों से सबसे बड़ी लूट का मामला सामने आया है. ZEE NEWS के बड़े खुलासे में दिखाया गया है कि किसानों के लिए आने वाला सब्सिडी वाला यूरिया गलत तरीके से प्लाईवुड फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा है. खुफिया कैमरे में कैद इस पूरे खेल में करोड़ों नहीं, बल्कि करीब 20 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई है.
Urea Scam India: देश में किसानों के लिए खाद बहुत जरूरी होती है. एक बोरी यूरिया पाने के लिए कई बार किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है. सरकार इस खाद पर भारी सब्सिडी देती है, ताकि किसानों को सस्ती कीमत पर मिल सके. लेकिन अब इसी सस्ती खाद पर कुछ बड़ी कंपनियों की नजर पड़ गई है. जांच में सामने आया है कि किसानों के लिए आने वाली यूरिया खाद को गलत तरीके से प्लाईवुड फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा है. रात के समय ट्रकों में भरकर ये खाद खेतों की बजाय फैक्ट्रियों में भेजी जा रही है. यानी जो खाद फसलों के लिए जरूरी है, वही अब दूसरे काम में इस्तेमाल हो रही है. इसको लेकर ZEE NEWS ने बड़ा खुलासा किया है.
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प्लाईवुड इंडस्ट्री में इस्तेमाल
असल में MDF और प्लाईवुड बनाने में भी यूरिया का इस्तेमाल होता है. कंपनियां सस्ती सब्सिडी वाली यूरिया खरीदकर अपने प्रोडक्शन में लगा रही हैं. इससे उनका खर्च काफी कम हो जाता है और मुनाफा बढ़ जाता है. यही वजह है कि किसान वाली यूरिया की मांग फैक्ट्रियों में तेजी से बढ़ रही है.
कीमत का बड़ा फर्क बना वजह
यूरिया की असली कीमत करीब ₹3800 प्रति बोरी होती है, लेकिन किसानों को यह सिर्फ ₹266 में मिलती है. यानी सब्सिडी के कारण इसकी कीमत बहुत कम हो जाती है. वहीं इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली यूरिया की कीमत काफी ज्यादा होती है. इसी बड़े अंतर का फायदा उठाकर यह पूरा खेल चलाया जा रहा है. जांच में यह भी पता चला कि इसमें सिर्फ एक-दो लोग नहीं, बल्कि पूरा नेटवर्क शामिल है. इसमें डीलर, दलाल, ट्रांसपोर्टर और फैक्ट्री तक कई लोग जुड़े होते हैं. ये लोग मिलकर सस्ती यूरिया को गलत जगह पहुंचाते हैं और सिस्टम का फायदा उठाते हैं.
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सरकार और किसानों को नुकसान
इस तरह की गड़बड़ी से सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. साथ ही किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाती. इससे खेती पर असर पड़ता है और उत्पादन भी कम हो सकता है. यानी इसका सीधा असर आम लोगों तक पहुंचने वाले अनाज पर भी पड़ता है. फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है और कई बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं. उम्मीद है कि आने वाले समय में इस पूरे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होगी. इससे किसानों को सही समय पर खाद मिलेगी और इस तरह की गड़बड़ी पर रोक लग सकेगी.
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