नई दिल्ली. पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों और रुपये की गिरावट से जूझ रहे भारत के लिए दीपावली पर अमेरिका से खुशखबरी आई है. उसने भारत समेत आठ देशों को ईरान से तेल खरीदने की छूट दे दी है. भारत ने घरेलू वृद्धि में तेल के दामों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका से इस प्रतिबंध को हटाने की मांग की थी. इसके लिए भारत लगातार अमेरिका के संपर्क में था. बता दें कि अमेरिका की कोशिश थी कि भारत सहित दूसरे देश 4 नवंबर 2018 से ईरान से तेल खरीदना छोड़ दें, जिसके बाद ईरान पर अमेरिका का प्रतिबंध लागू हो जाएगा.

भारत ईरान से कच्चे तेल का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. सूत्रों के अनुसार भारत अब ईरान से कच्चे तेल की खरीद को सालाना डेढ करोड़ टन तक सीमित रखना चाह रहा है. इससे पहले 2017-18 में भारत की ईरान से तेल खरीद दो करोड 26 लाख टन यानी चार लाख 52 हजार बैरल प्रतिदिन के स्तर पर रही. अमेरिका ने जिन देशों को छूट दी है उसमें भारत के अलावा जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं.

8 देशों को अस्थाई तौर पर छूट
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो का कहना है कि ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध से अमेरिका आठ देशों को अस्थाई तौर पर छूट देगा. इन देशों को यह छूट उनके द्वारा ईरान से तेल आयात में उल्लेखनीय कटौती करने के कदम को देखते हुए दी जा रही है. इन देशों के नाम सोमवार को जारी किए जाएंगे. पोम्पियो ने कहा कि सोमवार को ईरान पर प्रतिबंध लागू होने के बाद अमेरिका आठ देशों को ईरान से तेल आयात की अनुमति देगा, लेकिन यह आयात कम से कम होना चाहिए.

इस वजह से लगाया है प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और कथित तौर पर आतंकवाद को समर्थन देने के खिलाफ उस पर प्रतिबंध लगाया है. प्रतिबंध के तहत अमेरिका उन देशों और विदेशी कंपनियों को दंडित करेगा जो ईरान से तेल आयात बंद और काली सूची में डाली गई ईरान की कंपनियों के साथ व्यापार करना बंद नहीं करेंगी.

83 फीसदी आयात
भारत अपने तेल की पूर्ति को पूरा करने के लिए 83 फीसदी आयात पर निर्भर रहता है. इस साल भारत ने 90 बिलियन डॉलर कीमत का तेल आयात किया है और ज्यादातर पेमेंट अमेरिकी डॉलर में किया गया है. तेल कंपनी जो बाजार से कच्चे तेल का आयात करती हैं उसके लिए कीमत डॉलर और यूरो में चुकाती हैं. ऐसे में जब रुपये में लगातार गिरावट हो रही है तो उन्हें डॉलर खरीदने में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं. इसका असर इसलिए भी ज्यादा पड़ने लगा है क्योंकि रुपया इस साल 14.5 फीसदी गिर गया है.

रुपए में पेमेंट का सुझाव
दुनिया के सबसे बड़े ऑयल प्रोड्यूसर OPEC को भारत ने सुझाव दिया है कि वह भारत को अनुमति दे कि वह तेल के दामों का पेमेंट यूरो और डॉलर की जगह रुपए में करे. ओपेक भारत की जरूरत का 60 फीसदी तेल सप्लाई करता है. ऐसे में यदि यह शर्त मंजूर हो जाती है तो रुपए से पेमेंट से भारत की स्थिति बेहतर हो सकती है.