इन हवाई रास्तों पर है मिसाइल अटैक का खतरा, भारत के DGCA ने एयरलाइंस को 11 हाई-रिस्क एयरस्पेस से बचने को कहा

Written By: Shivendra Rai Updated by: Shivendra Rai
Updated Date:March 20, 2026 1:08 PM IST

हाई रिस्क जोन में ईरान, इजरायल, लेबनान, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, UAE, कतर और कुवैत के एयरस्पेस शामिल हैं. सीरिया और यमन के एयरस्पेस से भी बचने को कहा गया है.

Directorate General of Civil Aviation issued advisory: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण हवाई यात्रा करने वाले लोगों और एयरलाइंस को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कई देशों के एयरस्पेस डेंजर जोन में आ गए हैं जहां किसी भी समय ड्रोन या मिसाइल हमले का खतरा मंडरा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए भारत के एविएशन रेगुलेटर DGCA ने विमान कंपनियों के कहा है कि वे मिडिल ईस्ट के 11 हाई-रिस्क एयरस्पेस से उड़ान भरने से बचें.

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क्या है DGCA की एडवाइजरी?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण कई देशों के एयरस्पेस को नागरिक उड्डयन के लिए हाई-रिस्क वाला बताया गया है. हाई रिस्क जोन में ईरान, इजरायल, लेबनान, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, UAE, कतर और कुवैत के एयरस्पेस शामिल हैं. सीरिया और यमन के एयरस्पेस से भी बचने को कहा गया है.

भारत के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एक एडवाइज़री जारी की है, जिसमें सभी भारतीय एयरलाइंस को इन एयरस्पेस से दूर रहने के लिए कहा गया है. एडवाइजरी में प्रभावित जगहों के लिए उड़ानों को लेकर आपातकालीन योजनाओं को सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है. यह आदेश 28 मार्च तक लागू रहेगा.

एक विशेष ऑपरेशनल निर्देश में DGCA ने विमान कंपनियों से कहा है कि वे सऊदी अरब और ओमान में FL320 से नीचे उड़ान न भरें. बता दें कि यह एविएशन में इस्तेमाल होने वाला एक शब्द है जो समुद्र तल से 32,000 फीट की ऊंचाई के बराबर है. DGCA के निर्देशों से साफ है कि विमानों को ऊंचाई पर उड़ान भरना होगा जिससे वे संघर्ष से जुड़े जोखिमों से दूर रह सकें.

DGCA ने अपनी चेतावनी में कहा है कि युद्ध के कारण सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों में भी जोखिम बढ़ गया है. इसमें कहा गया है कि सैन्य गतिविधियों के दौरान गलत अनुमान के कारण नागरिक उड़ानें भी खतरे में आ सकती हैं.

जिन इलाकों में उड़ानें जारी हैं, वहां एयरलाइंस से बेहतर मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने और कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है. DGCA ने आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए मजबूत योजना तैयार रखने को भी कहा है. DGCA ने ऑपरेटर्स को सलाह देते हुए कहा है कि फ्लाइट क्रू को NOTAMs और उड़ान के दौरान एयरस्पेस से जुड़ी पाबंदियों के बारे में जानकारी दें.

बता दें कि युद्ध के दौरान ऐसे कई मौके आए हैं जब दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे बड़े केंद्र पर ड्रोन हमले के कारण उड़ानें स्थगित करनी पड़ी हैं और यात्रियों को बेसमेंट में छुपना पड़ा है.

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