भारत आ रहा था ईरानी कच्चे तेल से भरा टैंकर, बीच में हो गया खेल! रास्ता बदल कर जा रहा अब इस देश की ओर, जानें पूरा मामला
28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. इसके बाद से ही भारतीय रिफाइनर ईरानी तेल की कुछ खेप खरीदने की संभावनाएं तलाश रहे हैं.
नई दिल्ली: ईरान से कच्चा तेल लेकर आ रहे एक टैंकर ने बीच समंदर अपना रास्ता बदल लिया है. यह टैंकर अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित था और अब इसने अपनी मंजिल को भारत से बदलकर चीन कर लिया है. लगभग 7 साल बाद ऐसा होने वाला था जब ईरान का कच्चा तेल भारत आने वाला था. अफ्रामैक्स टैंकर 'पिंग शुन' को लेकर पहले खबर आई थी कि यह गुजरात के वाडिनार की ओर जा रहा है. लेकिन, अब जहाजों पर नजर रखने वाली कंपनी 'Kpler' के अनुसार यह चीन के डोंगयिंग की तरफ बढ़ रहा है.
टैंकर 'पिंग शुन' के बारे में अब तक क्या पता है?
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, इस टैंकर को 2002 में बनाया गया था जिसे 2025 में अमेरिका ने प्रतिबंधित कर दिया था. जहाज ट्रैकिंग कंपनी कप्लर’ ने बताया है कि पिछले तीन दिन से वाडिनार (भारत) की ओर बढ़ रहा ईरानी कच्चे तेल का जहाज पिंग शुन’ भारत को गंतव्य सूची से हटाकर अब चीन का संकेत दे रहा है. हालांकि, कप्लर’ की तरफ से ये भी कहा गया है कि यात्रा के दौरान इसमें बदलाव भी हो सकता है.
2019 के बाद पहली बार भारत आ रहा था ईरानी तेल
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदना बंद कर दिया था. 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है. इसके बाद से ही भारतीय रिफाइनर ईरानी तेल की कुछ खेप खरीदने की संभावनाएं तलाश रहे हैं. अगर ईरानी तेल से लदा टैंकर भारत आता को 2019 के बाद ऐसा पहली बार होता.
जहाज ट्रैकिंग कंपनी कप्लर’ के रिफाइनिंग एवं मॉडलिंग विभाग के प्रमुख विश्लेषक सुमित रिटोलिया के अनुसार, जहाज के गंतव्य में बदलाव का कारण भुगतान से जुड़ी शर्तें हो सकती हैं. दरअसल अब विक्रेता पहले दिए जाने वाले 30-60 दिन के क्रेडिट’ की सुविधा नहीं दे रहे हैं और कम समय में भुगतान करने को कह रहे हैं. अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इस कच्चे तेल का वास्तविक खरीदार और विक्रेता कौन है.
बता दें कि भारत ऐतिहासिक रूप से ईरानी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार रहा है. अमेरिकी प्रतिबंध 2018 में कड़े होने के बाद मई 2019 से भारत ने ईरानी तेल आयात बंद कर दिया था और इसकी जगह पश्चिम एशिया, अमेरिका तथा अन्य स्रोतों से तेल खरीदने लगा.
बता दें कि पिंग शुन’ जहाज पर करीब छह लाख बैरल तेल होने का अनुमान है जिसे चार मार्च के आसपास ईरान के खार्ग द्वीप से लोड किया गया था. अनुमान था कि यह टैंकर चार अप्रैल को भारत पहुंच जाएगा. ईरानी तेल खरीदने में सबसे बड़ी समस्या भुगतान की है. ईरान को वैश्विक बैंकिंग संदेश प्रणाली स्विफ्ट’ से बाहर कर दिया गया है. इसके कारण पहले भारत ईरान से तेल की खरीद कर तुर्की के एक बैंक के माध्यम से यूरो में भुगतान करता था. लेकिन, अब ये सुविधा भी उपलब्ध नहीं है.
(PTI इनपुट के साथ)
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