नई दिल्ली. दादरा एवं नगर हवेली के आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन (IAS Kannan Gopinathan) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. केरल में वर्ष 2018 में आई बाढ़ के समय अपनी पहचान छुपाकर लोगों की मदद करने को लेकर चर्चा में आया यह अधिकारी, एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार यह वजह उसका इस्तीफा है, जिसके पीछे उसने संविधान के अनुच्छेद 19-ए को आधार बनाया है. आईएएस के. गोपीनाथन ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा समय से लोगों के मूलभूत अधिकारों का हनन किया जा रहा है. राज्य में जो हालात बने हुए हैं, उसको लेकर उठने वाली आवाजें सुनी नहीं जा रही हैं. यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है. यह स्थिति स्वीकार करने योग्य नहीं है.

के. गोपीनाथन के इस्तीफे को लेकर केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि एक स्थानीय अखबार को दिए अपने इंटरव्यू में गोपीनाथन ने इस तरह की कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. केंद्र सरकार के AGMUT यानी अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और संघशासित प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी के. गोपीनाथन वर्तमान में दादरा एवं नगर हवेली में ऊर्जा, शहरी विकास और योजना विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं. इससे पहले वे सिलवासा कलक्टर बनाए गए थे. हाल में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की शिकायत निर्वाचन आयोग से करने के बाद उन्हें इस पद से हटाकर, सचिव बना दिया गया था.

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केंद्र सरकार को 21 अगस्त को अपना इस्तीफा भेजने के बाद विभिन्न अंग्रेजी अखबारों के साथ बातचीत में गोपीनाथन ने अपने इस्तीफे की वजह का खुलासा किया. अंग्रेजी अखबार द हिंदू के साथ बातचीत में गोपीनाथन ने कहा, ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने के बाद हमसे अपेक्षा की जाती है कि हम आम लोगों की आवाज बनें, लेकिन हमारी ही आवाज कहीं खो चुकी है.’ गुजरात से प्रकाशित हिंदी अखबार दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में भी के. गोपीनाथन ने अपनी बातें रखीं. उन्होंने कहा, ‘इस्तीफा देने का मेरा फैसला सैद्धांतिक है और मैं अपने सिद्धांत से समझौता नहीं कर सकता. पिछले कुछ दिनों से मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैं अपनी सोच को आवाज नहीं दे पा रहा हूं, इसलिए अपनी आवाज वापस पाने के लिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया.’

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अंग्रेजी अखबार दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में के. गोपीनाथन ने कहा, ‘अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश एक राज्य के ऊपर प्रतिबंध लगाता है और वहां के लोगों के मूलभूत अधिकारों का हनन करता है, तो मुझे लगता है कि इसके खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए.’ केरल के कोट्टयम के रहने वाले कन्नन गोपीनाथन वर्ष 2012 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में आए थे. मिजोरम और दादरा एवं नगर हवेली के कलक्टर के रूप में उनके कार्यकाल की सराहना की जाती रही है. आपको बता दें कि इससे पहले इसी साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर कैडर के IAS अधिकारी शाह फैजल ने भी इस सेवा से इस्तीफा दे दिया था. कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पैदा हुए हालात के बाद शाह फैजल को बीते दिनों गिरफ्तार कर लिया गया था.