नई दिल्ली/लखनऊ. शुक्रवार की दोपहर से सोशल साइट्स लखनऊ के कुछ फोटोज से भरा पड़ा है. इन तस्वीरों में खून से सने हुए युवक-युवतियां दिखाई दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि सभी भावी शिक्षक हैं. वही शिक्षक जिसके ऊपर हमारे बच्चों को और आने वाली पीढ़ी को संवारने का लक्ष्य दिया जाता है. अब सवाल होता है कि पुलिस इन भावी शिक्षकों क्यों मार रही है. तो बता दें कि ये भावी शिक्षक 68,500 सहायक शिक्षकों की भर्ती और 12460 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद कट ऑफ घटाकर रिक्त पद भरने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

41 याचिकाओं पर कोर्ट में हुई सुनवाई
प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती को दूर करने के लिए यूपी की योगी सरकार ने ये भर्ती निकाली थी. इसके लिए एक लाख 25 हजार 746 आवेदन आए थे. 27 मई को परीक्षा हुई और 13 अगस्त को रिजल्ट आए. रिजल्ट आने के साथ ही इस भर्ती में भी भ्रष्टाचार और नकल के आरोप लगने लगे. सरकार ने इसपर तुरंत एक्शन लिया और कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया. लेकिन, मामला कोर्ट तक पहुंच गया और पिछले 20 साल से यूपी में जो हो रहा है वह इस भर्ती में भी हो गया. 41,500 भावी शिक्षक 41 याचिकाओं के जरिए हाईकोर्ट पहुंचे, जिसमें सुनवाई के बाद 1 नवंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस इरशाद अली ने इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करते हुए सीबीआई जांच के आदेश दे दिए.

सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी सवाल
सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस परीक्षा में पास हुए कुछ अभ्यर्थियों को 4 सितंबर को नियुक्ति पत्र सौंपा था. इस दौरान उन्होंने कहा था कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के अपने वादे को धीरे-धीरे पूरा कर रही है और प्रदेश के युवा आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन, बाद में आरोप लगा कि सी एम द्वारा नियुक्ति पत्र पाए अभ्यर्थियों में 23 ऐसे हैं जो लिखित परीक्षा में पास नहीं हुए थे. बाद में इनकी नियुक्ति को रोकने का आदेश जारी हुआ, लेकिन तबतक पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ चुके थे. ये भी आरोप लगे हैं कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने दो ऐसे अभ्यर्थियों को पार कर दिया है, जिन्होंने परीक्षा ही नहीं दी थी. इसकी जांच कमेटी पर भी सवाल उठने लगे क्योंकि इसमें शामिल लोगों पर भी गड़बड़ी का आरोप था.

फोटो साभार: सोशल मीडिया

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विधान भवन पर कर रहे थे प्रदर्शन
यूपी बीटीसी प्रशिक्षु शिक्षक संघ 68,500 शिक्षक भर्ती के बैनर तले जुटे ये भावी शिक्षक कई टोलियों में विधान भवन पहुंचे थे. उन्होंने अपनी मांग दोहराई और प्रदर्शन करने लगे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विज्ञापन में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि न्यूनतम अर्हता 40-45 फीसदी रहेगी, लेकिन इसे घटाकर 30 से 33 फीसदी कर दिया गया. इसके बाद जब रिजल्ट आया तो उसे 40 से 45 फीसदी अर्हता के आधार पर जारी कर दिया गया, जिससे कई अभ्यर्थी फेल हो गए. उनका कहना है कि अभी भी 27,000 पद खाली हैं. ऐसे में कट ऑफ घटाकर इसे भरा जाए.

पुलिस ने किया लाठी चार्ज
इस बीच उनकी पुलिस के साथ झड़प हो गई, जो हाथापाई तक पहुंच गई. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी बुरी तरह से घायल हो गए. घायल में पुरुष और महिला दोनों हैं और जैसा की तस्वीरों में साफ तौर पर दिख रहा है कि पुलिस ने बुरी तरह से उन्हों पीटा है. किसी का सिर फूटा है तो किसी के चेहरे से खून निकल रहा है. कइयों के कपड़े फट गए हैं और कुछ किसी तरह गिरते-पड़ते हुए वहां से भागते दिख रहे हैं. कुछ लोग सड़क पर बेहोश भी हो गए थे. पुलिस के मुताबिक, 150 से ज्यादा अभ्यर्थियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई जा रही है.

फोटो साभार: सोशल मीडिया

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कोर्ट ने ये कहा
कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यूपी में पिछले 20 साल से राज्य सरकार, चयन बोर्ड या कमिशन में ज्यादातर भर्तियों में गड़बड़ी देखने को मिली है. अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुईं और सिर्फ जांच कमेटी बनाकर छोड़ दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार में शामिल अफसर बचते गए. ऐसे में पूरे मामले की जांच जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सीबीआई 6 महीने में जांच करे और 26 नवंबर को बताए कि अबतक उसने क्या किया है.

अधिकारी ने ये कहा
दूसरी तरफ यूपी बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती की सीबीआई जांच और 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसला का नवनियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर असर नहीं पड़ेगा. इस मामले में सरकार इसी महीने इसी महीने में खंडपीठ में अपील करेगी. चयनित शिक्षक नौकरी करते रहेंगे.