बांदा: उत्तर प्रदेश सरकार की तमाम कवायदों के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हो रहा है. शुक्रवार आधी रात एंबुलेंस न पहुंचने पर प्रसूता को एक सब इंस्पेक्टर अपने वाहन से अस्पताल लिए जा रहे थे और उसी दौरान उसने रास्ते में स्वस्थ्य शिशु को जन्म दे दिया. इस मामले में जहां स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी हो रही है. वहीं, लोग पुलिस की तारीफ कर रहे हैं. हुआ यह कि देहात कोतवाली क्षेत्र की भज्जू सिंह के पुरवा की रहने वाली प्रसूता चमेली (21) को शुक्रवार आधी रात प्रसव दर्द हुआ. परिजनों ने 108 एंबुलेंस को फोन कर मदद की गुहार लगाई, लेकिन दो घण्टे तक एंबुलेंस वहां नहीं पहुंचा.

बबेरू रोड बाईपास पर एंबुलेंस की आस में प्रसूता दर्द से कराह रही थी कि इत्तेफाक से मटौंध थाने में तैनात उपनिरीक्षक रोशन गुप्ता अपने निजी चार पहिया वाहन से वहां से गुजरे और प्रसूता की हालत देख खुद उसे अस्पताल ले जाने लगे. अस्पताल पहुंचने से कुछ दूर पहले ही मंडी के पास प्रसूता ने वाहन में स्वस्थ्य शिशु (बच्चे) को जन्म दे दिया.

पुलिसकर्मी की इस मदद पर प्रसूता के पिता श्याम सुंदर ने कहा, “कई बार एंबुलेंस को फोन किया गया, एंबुलेंसकर्मी ने फोन कर प्रसूता को सड़क पर लाने को कहा, फिर भी दो घण्टे तक एंबुलेंस नहीं आई. आधी रात में दरोगा जी फरिस्ता बनकर आए और बेटी व उसके बच्चे की जान बच गई.”

पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा ने भी इस मदद के लिए उपनिरीक्षक की तारीफ की है. इस मामले में जब मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार से पूछा गया तो वह व्यस्तता की बात कह कर बात टाल गए. सामाजिक संगठन ‘पब्लिक एक्शन कमेटी’ की प्रमुख श्वेता ने कहा, “यह पहला मामला नहीं है, जब एंबुलेंस ने दगा दिया हो. यहां की स्वास्थ्य सेवाएं इतनी लचर हो गई हैं कि अब इनका भरोसा करने लायक नहीं है. इससे बेहतर तो गरीब की बैलगाड़ी है.”