
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Uttar Pradesh Primary Education Rule: उत्तर प्रदेश सरकार ने कम उम्र के बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने के लिए एक खास पहल शुरू की है. यूपी सरकार ने राज्य के सभी माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों में पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करने और मोबाइल स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए दैनिक शैक्षणिक गतिविधियों में अखबार पढ़ना अनिवार्य करें.
माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा 23 दिसंबर को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिष्ठित हिंदी और अंग्रेजी अखबार स्कूलों के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराए जाएं और छात्रों की पहुंच में हों. आदेश के अनुसार, सुबह की प्रार्थना सभा में कम से कम 10 मिनट अखबार पढ़ने के लिए निर्धारित किए जाएं. इस दौरान छात्र बारी-बारी से राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और खेल समाचारों के साथ-साथ प्रमुख संपादकीय व महत्वपूर्ण सकारात्मक घटनाक्रम पढ़ेंगे.
विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे रोजाना ‘दिन का शब्द’ अभ्यास शुरू करें जिसमें अखबारों से पांच कठिन शब्द चुनकर उन्हें नोटिस बोर्ड पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए. सरकारी आदेश में कहा गया कि नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ने से छात्रों के सामान्य ज्ञान, शब्दावली, आलोचनात्मक सोच, एकाग्रता और सामाजिक जागरुकता में वृद्धि होगी. साथ ही यह उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर ढंग से तैयार करने व फर्जी खबरों के प्रति जागरूक बनाने में भी सहायक होगा.
स्कूलों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों को मासिक या त्रैमासिक स्कूल समाचार पत्र अथवा पत्रिकाएं प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित करें. कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए संपादकीय लेखन या समूह चर्चा आयोजित की जाए. ‘क्रॉसवर्ड’ और ‘सुडोकू’ प्रतियोगिताएं कराई जाएं तथा कनिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों में अखबारों की कटिंग से ‘स्क्रैपबुक’ बनाने की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए.
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये निर्देश दो नवंबर को जारी किए गए एक पूर्व आदेश की निरंतरता में हैं जिसके तहत राज्य सरकार ने विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करने और मोबाइल फोन व सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पर अंकुश लगाने के लिए एक व्यापक पठन अभियान शुरू किया था.
उस आदेश में विद्यार्थियों को सरकारी जिला पुस्तकालयों तक पहुंच की अनुमति देने प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक गैर-पाठ्यक्रम पुस्तक जारी करने को अनिवार्य बनाने और उत्साही पाठकों के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र जैसे प्रोत्साहन शुरू करने का प्रावधान किया गया था. वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दोनों आदेश सभी संभागीय शिक्षा अधिकारियों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेज दिए गए हैं तथा राज्यभर में इनके कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं.
(इनपुट- एजेंसी)
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