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उत्तराखंड की वो भयानक आपदाएं जिसमें बह गए पूरे-के-पूरे गांव, सैकड़ों लोग हो गए लापता, नहीं मिला सुराग
उत्तरकाशी में हाल ही में बादल फटने से 5 मौतें और 200 से ज्यादा लोग लापता हो गए. जानिए उत्तराखंड की उन बड़ी आपदाओं के बारे में, जिनसे सैकड़ों जिंदगियां खत्म हो गईं.
उत्तरकाशी में हाल ही में जो तबाही मची, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि पहाड़ों में कुदरत का मिजाज कितना खतरनाक हो सकता है. 5 अगस्त को धराली और सुखी टॉप इलाके में अचानक बादल फटा और तेज बारिश के साथ पानी ऐसे आया कि पूरा गांव तबाह हो गया. होटल, घर और दुकानें सब मलबे में तब्दील हो गए. अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लापता हैं.
कब-कब बादल फटने से हुआ बड़ा हादसा?
उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाएं कोई नई बात नहीं है. पहले भी कई बार आपदाएं आईं है, जिसमें पूरे-के-पूरे गांव बह गए. चलिए खबर के माध्यम से जानते हैं उन भयानक आपदाओं के बारे में, सैकड़ों लोग एक साथ लापता हो गए और आज तक कोई सुराग नहीं मिल पाया.
अभी जून, 2025 में यमुनोत्री हाईवे के पास तेज बारिश के साथ पानी का बहाव आया और लोग बह गए. इसमें दो मजदूरों की मौत हुई और बाकी लापता हो गए.
अगस्त, 2024 में भी रुद्रप्रयाग जिले में बादल फटने से 11 लोगों की जान गई थी और कई लापता हुए थे.
अगस्त, 1998 की मालपा (पिथौरागढ़) में बादल फटने और लैंडस्लाइड से पूरा गांव मिट गया था. इसमें 221 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें भारत की मशहूर करालकार प्रेतिमा बेदी भी शामिल थीं.
पहले भी कई गांव तबाह, कई जिंदगियां लापता
उत्तराखंड में बादल फटने की कई घटनाएं पहले भी तबाही मचा चुकी हैं. जुलाई 2024 में टिहरी के घनसाली इलाके में एक ही परिवार के तीन लोग मारे गए थे. 31 जुलाई को पिथौरागढ़ में 11 लोगों की मौत हुई. 2012 में उत्तरकाशी के उखीमठ क्षेत्र में 33 लोगों की जान गई और कई लापता हो गए थे. 2014 में टिहरी में 6 लोगों और 2016 में सिंहाली में 12 लोगों की मौत की खबर सामने आई थी. इन आंकड़ों से साफ है कि हर कुछ साल में पहाड़ की कोई न कोई घाटी कुदरत के गुस्से का शिकार बनती है, लेकिन सवाल यह है कि हम इससे कितना सीखते हैं?
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