उत्तराखंड के नशाली, पिथौरागढ़ और कौडिपाड़ इलाकों में शनिवार रात बादल फटने की खबर मिली है। भारी बारिश के कारण 1 व्यक्ति की मौत हो गई और 50 से भी ज्यादा घर तबाह हो गए। खतरे को देखते हुए चार धाम यात्रा रोक देनी पड़ी है। टिहरी जिले में लगातार भारी बारिश से केदारनाथ जा रहे श्रृद्धालु रास्ते में ही फँस गए। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।

बादल फटने की घटना के बाद बारिश से भारी नुकसान हुआ है। गंगोत्री-केदारनाथ सड़क बंद कर दी गई है। इस सड़क का ज्यादातर हिस्सा बह गया है। इसके अलावा इस बारिश से खेतों को भी भारी नुकसान पहुँचा है। मौसम विभाग ने चार धाम यात्रियों को अगले चार दिन तक एलर्ट रहने की चेतावनी जारी की है। इस बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित बिजली सप्लाई हुई है। इलाके में बिजली नहीं मिल पा रही। प्रशासन इस काम में लगा हुआ है।

उत्तराखंड में एक के बाद एक प्राकृतिक आपदाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बादल फटने की घटना से पहले उत्तराखंड के जंगलों में आग लगी हुई थी। पिछले तीन महीने में उत्तराखंड के दोनों मंडलों कुमाऊँ और गढ़वाल में आग की करीब 600 घटनाएँ हुई, इसमें 1143 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो गए। कुमाऊं में आग की 130 घटनाओं में 271 एकड़ वन प्रदेश और गढ़वाल में 608 एकड़ वन प्रदेश आग की चपेट में आ चुके हैं। इसके अलावा जानवरों के लिए संरक्षित 262 हेक्टेयर जंगल भी आग की चपेट में है। माना जा रहा था कि ये आग 15 जून तक रह सकती है। इस सूरत में तबाही का दायरा और बढ़ सकता था। यह भी पढ़ेंः उत्तराखंड के जंगलों में 90 दिनों से लगी आग पड़ने लगी ठंड़ी, राहत की बारिश