Uttarakhand Glacier Burst and Flood News update: उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में अचानक आई विकराल बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्र में बचाव और राहत अभियान में तेजी लाई गई है जबकि आपदा में मरने वालों की संख्या 19 पहुंच गई और 200 से ज्यादा लोग अभी लापता हैं. Also Read - Uttarakhand में फिर इस तरह हुआ भूस्‍खलन, सामने आया पहाड़ टूटने का ये वीडियो

ऋषिगंगा घाटी के रैंणी क्षेत्र में हिमखंड टूटने से ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में रविवार को अचानक आई बाढ़ से प्रभावित 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा और 480 मेगावाट की निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड पनबिजली परियोजनाओं में लापता हुए लोगों की तलाश के लिए सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों के बचाव और राहत अभियान में जुट गए जिससे सोमवार को इन कार्यों में तेजी आई. Also Read - Rishi Ganga में Glacier Burst के बाद बनी झील का फ्लो बढ़ाया जा रहा है, सामने आया ये वीडियो

उत्तराखंड पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि अभी तक 202 लोग लापता हैं. पुलिस ने ट्वीट किया, “कल के हादसे में अभी तक लगभग 202 लोगों के लापता होने की सूचना है, वहीं 19 के शव अलग अलग स्थानों से बरामद किए गए है. शोक और दुःख की इस घड़ी में प्रशासन आपके साथ है, कृपया सहयोग बनाए रखें. राहत-बचाव कार्य त्वरित रूप से जारी है.” Also Read - भारतीय वायुसेना और नेवी के जवानों ने मिलकर मापी तपोवन में 'कुदरती झील' की गहराई, जानिए क्या है इसका साइज

आपको बता दें कि तपोवन टनल में भी लगातार राहत बचाव कार्य चल रहा है. अभी तक 100 मीटर तक टनल की सफाई हुई है, यहां करीब 37 लोगों के फंसे होने की खबर है. आईटीबीपी के मुताबिक, चार बजे तक जेसीबी द्वारा टनल के रास्ते को कुछ हदतक साफ कर दिया जाएगा. जिसके बाद टीमों और स्निफर डॉग को अंदर भेजा जाएगा.

बचाव और राहत अभियान जोरों से जारी है जिसमें बुलडोजर, जेसीबी आदि भारी मशीनों के अलावा रस्सियों और खोजी कुत्तों का भी उपयोग किया जा रहा है. तपोवन क्षेत्र में बिजली परियोजना की बड़ी सुरंग के घुमावदार होने के कारण उसमें से मलबा निकालने तथा अंदर तक पहुंचने में मुश्किलें आ रही हैं.

रविवार को आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करके आए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को कहा कि इस सुरंग में करीब 35 लोगों के फंसे होने की आशंका है. उन्होंने कहा कि रविवार से ही इन लोगों को निकालने के लिए तलाश और बचाव अभियान चलाया जा रहा है तथा इसके लिए मौके पर पर्याप्त मानव संसाधन मौजूद है.

रावत ने कहा कि पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार कल से ही इस क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं जबकि गढ़वाल आयुक्त और पुलिस उपमहानिरीक्षक, गढ़वाल को भी सोमवार से वहीं डेरा डालने के निर्देश दिये गये हैं. उन्होंने कहा कि चमोली जिला प्रशासन की पूरी टीम रविवार से ही क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्यों में लगी है. इसके अलावा अन्य जिलों से भी अधिकारी मौके पर भेजे गये हैं ताकि वहां मिलने वाले शवों का पंचनामा एवं पोस्टमार्टम जल्द हो सके.

बाढ़ आने का कारण तत्काल पता नहीं चल पाया है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि हिमखंड टूटने से नदी में बाढ़ आ गई. इस संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि घटना के कारणों का पता लगाने के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिये गये हैं और उनसे कहा गया है कि इसरो के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से इस घटना के कारणों का पता किया जाये ताकि भविष्य में कुछ एहतियात बरती जा सकें.

पांडे ने बताया कि घटनास्थल पर आईटीबीपी के करीब 300 जवान मौजूद हैं. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ‘हेड रेस टनल या एचआरटी’ में करीब 34 लोग फंसे हुए हैं. पांडे ने बताया कि बल के अतिरिक्त महानिदेशक (पश्चिम कमान) एम एस रावत ने सोमवार को घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और वहां काम कर रहे अधिकारियों से बात की.

एनडीआरएफ के प्रमुख एस एन प्रधान ने ट्विटर पर बताया कि एमआई-17 हेलिकॉप्टरों की मदद से घटनास्थल पर और दलों को भेजा गया है. ये हेलिकॉप्टर जोशीमठ में हैलिपेड पर उतरे. उन्होंने कहा कि एजेंसियां करीबी समन्वय में काम कर रही हैं.

रविवार शाम को एक छोटी सुरंग से आईटीबीपी के जवानों ने कम से कम 12 लोगों को बचाया था. उनमें से तीन को आईटीबीपी के जोशीमठ स्थित अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. आईटीबीपी के एक अधिकारी ने बताया कि उन लोगों की हालत ठीक है.

(इनपुट भाषा)