नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के एक स्कूल के कुछ विद्यार्थियों द्वारा पोर्न साइट देखने के बाद अपनी एक सहपाठी से सामूहिक बलात्कार करने संबंधी खबर का संज्ञान लेते हुए केंद्र से अश्लील वेबसाइटों पर पाबंदी कड़ाई से लागू करने को कहा है. हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरनेट सेवा प्रदाता इस निर्देश का उल्लंघन करने पर आईटी एक्ट, 2000 की धारा 25 के तहत अपना लाइसेंस गंवा बैठेंगे. बता दें कि पिछले दिनों दून घाटी के एक बोर्डिंग स्कूल में एक 10वीं छात्रा से चार लड़कों ने गैंगरेप किया था. ये मामला तब सामने आया था, जब लड़की गर्भवती हो गई थी. Also Read - उत्तराखंड: हाई कोर्ट ने यूपीसीएल को लगाई फटकार, कहा- अपनों से नाममात्र के बिल, दूसरों से रेट लिस्ट

इस पाबंदी को लागू करने के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने कहा, ”इन अश्लील साइटों तक पहुंच पर रोक लगाने की जरूरत है ताकि बच्चों के सुबोध मस्तिष्क को प्रतिकूल प्रभाव से बचाया जा सके.” Also Read - छात्रवृत्ति घोटाला: हाईकोर्ट के चाबुक का दिखा असर, संयुक्त निदेशक को भेजा गया जेल

खबरों के मुताबिक चार छात्रों ने जांच के दौरान पुलिस से कहा कि उन्होंने इंटरनेट पर पोर्न फिल्म देखी थी और उसके बाद लड़की से सामूहिक बलात्कार किया. पीड़िता कक्षा दसवीं की छात्रा थी. अदालत ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी इन अश्लील साइटों पर पाबंदी के संबंध में केंद्र द्वारा जारी की गई अधिसूचना का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरनेट सेवा प्रदाता इस निर्देश का उल्लंघन करने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 25 के तहत अपना लाइसेंस गंवा बैठेंगे. Also Read - 'केदारनाथ' का रास्ता साफ, उत्तराखंड हाईकोर्ट का रिलीज पर रोक से इनकार