देहरादून: शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा पंत प्रकरण के एक दिन बाद आज उत्तराखंड राजकीय राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने मामले को संज्ञान लेते हुए कहा कि शिक्षिका के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए. इसके लिए अधिकारियों से मिला जाएगा. शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षिका 25 वर्षों से दुर्गम स्थान पर कार्यरत हैं और विधवा भी हैं, इसलिए उनकी स्थानांतरण की मांग जायज है जिसे सुना जाना चाहिए. Also Read - हरिद्वार की Shrishti Goswami बनीं Uttarakhand की 'एक दिन की मुख्यमंत्री', जानें क्या है पूरा मामला...

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शिक्षक संघ ने कहा कि टीचर की मांग जायज, लेकिन… Also Read - Love Jihad Law: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी और उत्तराखंड के 'लव जिहाद' कानून पर रोक लगाने से इनकार किया, राज्य सरकारों को भेजा नोटिस

इस मामले को लेकर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षा संघ के महासचिव दिग्विजय सिंह चौहान ने कहा कि संघ इस प्रकरण को लेकर अनुरोध करेगा कि उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई न की जाए. चौहान ने कहा कि शिक्षिका 25 वर्षों से दुर्गम स्थान पर कार्यरत हैं और विधवा भी हैं, इसलिए उनकी स्थानांतरण की मांग जायज है, जिसे सुना जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षिका द्वारा अपनी मांग के लिए मुख्यमंत्री के सामने प्रयोग की गई ‘अमर्यादित भाषा’ का वह कतई समर्थन नहीं करते.

सीएम ने पूछा, नौकरी लेते वक़्त क्या लिखकर दिया था?

महिला ने सीएम से अपनी बात कही. इस पर सीएम ने महिला से कहा कि नौकरी लेते वक्त उन्होंने क्या लिख कर दिया था? इस पर टीचर उत्तरा ने जवाब दिया कि यह लिखकर नहीं दिया था की जीवन भर वनवास में रहेगी. इसके बाद हंगामा शुरू हुआ. सीएम ने महिला को हिरासत में लेने के आदेश दे दिए. इस पर महिला ने सीएम को अपशब्द कह दिए. 57 वर्षीय उत्तरा के पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि वह बहुत दुखी हैं और कल शाम से ही रो रही हैं. वर्ष 2015 में अपने पति की मृत्यु के बाद से ही वह परेशान चल रही थीं और अपने स्थानांतरण को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक अपनी गुहार लगा चुकी हैं.

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25 साल से दुर्गम इलाके में पढ़ा रही महिला

बता दें कि उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के जनता मिलन समारोह में जमकर हंगामा हुआ. 25 साल से दुर्गम इलाके में नौकरी कर बच्चों को पढ़ा रही महिला ने सीएम से ट्रांसफर की मांग की. इस पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत भड़क गए. उन्होंने महिला से बार-बार कहा कि ‘सस्पेंड कर दूंगा बता दिया मैंने तुमको. सस्पेंड हो जाओगी. इसको सस्पेंड कर दीजिए. सस्पेंड कर दो. ले जाओ इसे बाहर. ले जाओ इसको. इसको कस्टडी में ले जाओ.’ इसके बाद भड़की महिला ने सीएम को अपशब्द कहे. और बुरा भला कहती रही जब तक पुलिस उसे बाहर नहीं ले गई. उन्हें निलंबित कर दिया गया और हिरासत में ले लिया गया था. उनके खिलाफ पुलिस ने शांति भंग के तहत चालान किया. हालांकि, कल शाम को ही उन्हें सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया.