Uttarkashi Tunnel Rescue: वर्टिकल ड्रिलिंग आज भी जारी, जानिए कितना दिन लगेंगे और कब मजदूरों को निकाला जा सकता है बाहर

बचाव कार्यों में सहयोग के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से नियुक्त नोडल अधिकारी नीरज खैरवाल ने बताया कि मलबे में फंसे ऑगर मशीन के हिस्सों को प्लाज्मा कटर और लेज़र कटर से काट कर निकालने का कार्य जारी है.

Published date india.com Published: November 27, 2023 7:58 AM IST
Uttarkashi Tunnel Rescue: वर्टिकल ड्रिलिंग आज भी जारी, जानिए कितना दिन लगेंगे और कब मजदूरों को निकाला जा सकता है बाहर

Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल हादसे को आज पूरे 16 दिन हो गए हैं लेकिन अभी भी रेस्क्यू टीम को कोई सफलता नहीं मिली है. बीते तीन दिनों से रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार कई परेशानियां आ रही हैं.मजदूरों को निकालने के लिए रविवार को शुरु हुआ वर्टिकल ड्रिलिंग का काम आज भी जारी है. पहले दिन करीब 20 मीटर खुदाई कर ली गयी . उत्तराखंड में चारधाम मार्ग पर बन रही साढ़े चार किलोमीटर सुरंग का एक हिस्सा ढहने से फंसे श्रमिकों के बाहर आने को लेकर बढ़ रहे इंतजार के बीच शुरू की गयी लंबवत ‘ड्रिलिंग’ उन पांच विकल्पों में से एक है जिन पर कुछ दिन पहले काम शुरू किया गया था.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के उप सचिव मंगेश घिल्डियाल सिल्कयारा टनल बचाव स्थल पर पहुंच गए हैं. वहीं, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव PK मिश्रा और उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुखबीर सिंह संधु भी हादसे वाली जगह पर पहुंच रहे हैं. 6 मजदूरों की टीम टनल की साइट पर दिल्ली से पहुंची हैं. सभी मजदूर रैट मीनिंग करेंगे.

ड्रिलिंग में लगेगा चार दिन

अधिकारियों ने यहां बताया कि क्षैतिज ड्रिलिंग कर रही अमेरिकी ऑगर मशीन के टूटने के एक दिन बाद लंबवत ‘ड्रिलिंग’ शुरू की गयी है . उन्होंने बताया कि सुरंग में फंसे श्रमिकों तक पहुंचने के लिए कुल 86 मीटर लंबवत ड्रिलिंग की जाएगी और इसमें चार दिन का समय लगेगा . उनके अनुसार शाम तक 19.5 मीटर ड्रिलिंग कर ली गयी थी .

इससे कुछ दूरी पर, इससे पतले 200 मिमी व्यास के पाइप अंदर डाले जा रहे हैं जो 70 मीटर तक पहुंच चुके हैं. सुरंग के सिलक्यारा छोर से अमेरिकी ऑगर मशीन के जरिए की गयी क्षैतिज ‘ड्रिलिंग’ में बार-बार व्यवधाान आने के बाद लंबवत ‘ड्रिलिंग’ के विकल्प को श्रमिकों तक पहुंचने के लिए चुना गया . सुरंग में अनुमानित 60 मीटर क्षेत्र में मलबा फैला है. करीब 25 टन वजनी ऑगर मशीन में ताजा अवरोध शुक्रवार शाम को आया जब उसके ब्लेड मलबे में फंस गए .

30 नवंबर तक मजदूर बाहर आ सकते हैं

राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद ने सिलक्यारा में संवाददाताओं को बताया कि लंबवत ड्रिलिंग शुरू कर दी गयी है और अब तक 19.2 मीटर ड्रिलिंग की जा चुकी है . उन्होंने बताया कि सतलुज जलविद्युत निगम द्वारा शुरू की गयी लंबवत ड्रिलिंग का कार्य काफी जोर-शोर से चल रहा है और अगर बिना किसी अड़चन के यह इसी तरह चलता रहा तो “हम इसे चार दिन में 30 नवंबर तक खत्म करने की उम्मीद कर सकते हैं .

क्षैतिज ड्रिलिंग कर रही ऑगर मशीन के ब्लेड शनिवार को मलबे में फंस गए थे जिससे बचाव अभियान में रुकावट आ गई थी. चारधाम यात्रा मार्ग पर बन रही सिलक्यारा सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था जिसमें उसमें काम कर रहे श्रमिक फंस गए थे. उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर कई एजेंसियों द्वारा बचाव अभियान चलाया जा रहा है .

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