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नई दिल्ली:  हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं एवं अन्य अलगाववादी संगठनों के नेताओं ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित पाकिस्तान दिवस समारोह में हिस्सा लिया, हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के साथ कश्मीर एवं अन्य मुद्दे सुलझाने के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में आयोजित पाकिस्तान दिवस समारोह में विदेश राज्यमंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह ने भी हिस्सा लिया। समारोह में कांग्रेस के भी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर भी उपस्थित थे।

इस वर्ष इस समारोह में मीडिया ने खास रुचि दिखाई, क्योंकि पिछले साल भारत के आग्रह की अनदेखी कर पाकिस्तान के राजदूत के कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के साथ मुलाकात करने पर नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी थी।

हालांकि उसके बाद दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर संपर्क फिर कायम हो गए और भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर ने दक्षेस देशों की यात्राओं के तहत इसी महीने की शुरुआत में पाकिस्तान का दौरा किया।

पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने वी. के. सिंह का ‘मुख्य अतिथि’ कहकर स्वागत किया।

बासित ने बाद में आईएएनएस से कहा, “हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक शांतिपूर्ण एवं संघर्ष रहित वातावरण देने के लिए वचनबद्ध हैं।”

बासित ने रविवार को हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक से मुलाकात की थी। इससे पहले बासित इसी महीने कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली गिलानी से मुलाकात कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने गिलानी को भारतीय विदेश सचिव जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहम चौधरी के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत से अवगत कराया था।

बासित ने रविवार को कहा था कि उनकी हुर्रियत के नेताओं के साथ मुलाकात से भारत सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।

बासित के इस बयान पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने का एकमात्र तरीका शांतिपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता है।

अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान के साथ लंबित मुद्दों को हल करने के लिए भारत के रुख को लेकर गलतफहमी की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

अकबरुद्दीन ने कहा, “कई अवसरों पर यह बात दोहराई गई है कि तथाकथित हुर्रियत की भूमिका पर भारत के रुख को लेकर किसी तरह की गलतफहमी या गलत बयानी की कोई गुंजाइश नहीं होगी।”

उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों पर केवल दो ही पक्ष हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष के शामिल होने के लिए बिल्कुल जगह नहीं है।

उन्होंने कहा, “शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के दायरे में दोनों देश सिर्फ शांतिपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही सभी लंबित मुद्दों पर आगे बढ़ सकते हैं।”

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान अपने राष्ट्रीय दिवस पर जिसे भी चाहे उसे बुला सकता है।

समारोह में शरीक होने के बाद बाहर आए गिलानी ने ‘आजादी’ और जम्मू एवं कश्मीर में ‘राज्य पर्यटन’ की बातें कीं। इसके अलावा गिलानी ने 2010 में अपने संगठन द्वारा कश्मीर मसले की बातचीत के जरिए हल निकालने के लिए दी गई पांच शर्तो का भी जिक्र किया।

गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ वार्ता के जरिए कश्मीर मसले का हल निकालने के लिए भारत को हुर्रियत द्वारा रखी गई पांचों शर्ते मान लेनी चाहिए, जिसमें कश्मीर को विवादित क्षेत्र स्वीकार करना, सुरक्षा बलों एवं ‘काले कानूनों’ को हटाना, 2010 में कश्मीर में 128 लोगों की हत्या के दोषियों को सजा और राजनीतिक बंदियों की रिहाई की शर्ते शामिल हैं।

गिलानी ने कहा, “जब तक ये पांचों मांगें पूरी नहीं होतीं, बातचीत का कोई फायदा नहीं है।”