
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
वंदे भारत ट्रेन का स्लीपर वर्जन बहुत जल्द पटरी पर दौड़ने वाला है. रेलवे मंत्रालय और इससे जुड़े विभागों ने ट्रेन शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है. स्लीपर वंदे भारत का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया जाएगा, हालांकि इसके लिए अभी तारीख का ऐलान नहीं हुआ है. लेकिन ऐसी खबरें हैं कि 17 या 18 जनवरी को ट्रेन का शुभारंभ हो सकता है. तेज रफ्तार, आधुनिक सुविधाएं और स्लीपर कोच – ये तीनों खूबियां इस ट्रेन को खास बनाती हैं. यही वजह है कि इससे सफर करने वाले यात्रियों में उत्सुकता देखी जा रही है.
रेलवे की योजना के अनुसार, पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलाई जाएगी. उद्घाटन वाले दिन ट्रेन का पूरा शेड्यूल अभी जारी नहीं किया गया है, जिसे तारीख फाइनल होते ही सार्वजनिक किया जाएगा. इस ट्रेन में करीब 823 बर्थ होंगी, जिनमें फर्स्ट एसी, सेकेंड एसी और थर्ड AC कोच शामिल हैं. स्लीपर वंदे भारत को खासतौर पर लंबी दूरी के यात्रियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि रात का सफर आरामदायक और सुरक्षित हो सके. आधुनिक इंटीरियर, बेहतर सस्पेंशन और तेज रफ्तार के चलते यह ट्रेन भविष्य में लंबी दूरी के सफर का पसंदीदा विकल्प बन सकती है.
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या उद्घाटन के दिन आम यात्री इस ट्रेन में सफर कर पाएंगे? रेलवे के नियमों के अनुसार, उद्घाटन वाले दिन ट्रेन में आम यात्रियों की बुकिंग नहीं होती. पहले दिन सिर्फ रेलवे द्वारा आमंत्रित खास मेहमान ही सफर करते हैं. इनमें सांसद, विधायक जैसे जनप्रतिनिधि, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं, स्कूली बच्चे और मीडिया के लोग शामिल होते हैं. इसका मकसद ट्रेन की सुविधाओं को अलग-अलग वर्गों तक पहुंचाना और उनकी प्रतिक्रिया लेना होता है, ताकि नियमित संचालन से पहले जरूरी सुधार किए जा सकें.
जनप्रतिनिधियों (वीआईपी) का चयन आमतौर पर उन्हीं इलाकों से किया जाता है, जहां से ट्रेन गुजरती है. संबंधित क्षेत्रों के सांसद, विधायक और स्थानीय प्रतिनिधियों को उद्घाटन यात्रा के लिए आमंत्रित किया जाता है. वहीं स्कूली बच्चों के चयन के लिए रेलवे की ओर से निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जिसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को ट्रेन में सफर करने का मौका मिलता है. पहले दिन ट्रेन में सफर करने वालों की संख्या 823 से भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई जनप्रतिनिधि एक स्टेशन से सवार होकर अगले स्टेशन पर उतर जाते हैं और वहां से दूसरे प्रतिनिधि सवार होते हैं. इस तरह उद्घाटन के दिन बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनते हैं.
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