अब बंगाल के हर स्कूल में गूंजेगा 'वंदे मातरम्', नई सरकार का बड़ा आदेश, जानें क्या बोला विपक्ष
पश्चिम बंगाल की नई BJP सरकार ने सरकारी स्कूलों में 'वंदे मातरम्' गीत कंपलसरी कर दिया है. सुबह की प्रार्थना सभा में सभी छात्रों को यह गीत गाना होगा. फैसले के बाद राजनीति और राष्ट्रवाद पर नई बहस शुरू हो गई है.
West Bengal Mataram Mandatory in Schools: पश्चिम बंगाल में नई बीजेपी सरकार बनने के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान 'वंदे मातरम्' गीत कंपलसरी कर दिया है. सरकार का कहना है कि ये कदम छात्रों में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है.
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले छात्र 'वंदे मातरम्' गाएंगे. सरकार ने इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू करने की बात कही है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा विभाग के सभी स्कूलों में राष्ट्रीय गीत को नियमित रूप से गाने की व्यवस्था लागू कर रही है.
आजादी की लड़ाई में इसी गीत ने भरा था जोश
'वंदे मातरम्' भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक बड़ा प्रेरणास्रोत माना जाता रहा है. आजादी की लड़ाई में ये गीत कई क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए जोश और देशभक्ति का प्रतीक बना था. बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया था. बाद में इसके शुरुआती दो अंतरों को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया.
इस साल केंद्र सरकार की तरफ से वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान जन गण मन’ के बराबर सम्मान दिए जाने के बाद इसकी चर्चा और बढ़ गई. सरकार ने कई सरकारी कार्यक्रमों और स्कूल आयोजनों में इसके गायन को लेकर नए निर्देश भी जारी किए थे. इसके साथ ही गीत के 150 साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम और संसद में चर्चा भी आयोजित की गई थी.
हालांकि, इस फैसले के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है. विपक्षी दलों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक विचारधारा से दूर रखना चाहिए. वहीं, बीजेपी इसे भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना से जोड़कर देख रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि स्कूलों में राष्ट्रीय गीत गाने से छात्रों के मन में देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी.
राजनीतिक विवाद
वंदे मातरम्’ को लेकर पहले भी कई बार राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं. गीत के पूरे छह अंतरों को लेकर अलग-अलग दलों की राय अलग रही है. कुछ राजनीतिक दलों ने पहले केवल शुरुआती दो अंतरों को स्वीकार किया था, जबकि बीजेपी लंबे समय से पूरे गीत को महत्व देने की बात करती रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा था कि गीत के कुछ हिस्सों को हटाने से इतिहास में विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिला.
पश्चिम बंगाल में इस फैसले को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक राजनीति का प्रभाव रहा है. ऐसे में स्कूलों में 'वंदे मातरम्' को अनिवार्य बनाने का फैसला आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है. फिलहाल राज्य सरकार इसे राष्ट्रहित और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है.
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