नई दिल्ली/जयपुर. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया राज्य में ‘गौरव यात्रा’ निकाल रही हैं. इसके चौथे चरण की शुरुआत शुक्रवार को कोटा से होगी. इसमें वह हदोती क्षेत्र के चार जिले कोटा, झलवर, बुंदी और बारन जिले से होकर गुजरेंगी. इसमें राजे की खुद की विधासनभा सहित 17 सीटे हैं. लेकिन कहा जा रहा है कि उन्हें किसानों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है.

बता दें कि इस क्षेत्र में ही झरवन-बारन लोकसभा सीट है, जहां से राजे के बेटे दुष्यंत सिंह चुन गए हैं. इन 17 सीटों में बीजेपी के पास अभी 16 सीटें हैं. वहीं, कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट है. हालांकि, बताया जा रहा है कि राजे की यह यात्रा उनकी खुद की विधानसभा सीट से होकर नहीं गुजरेगी. इसके पीछे कारण बताया जा रहा है कि दो दिन पहले ही हुए यूनिवर्सिटी चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी को करारी शिकस्त दी है.

दूसरी तरफ इस क्षेत्र में वसुंधार की प्रतिष्ठा दांव पर है. कुछ महीने पहले इसी क्षेत्र में किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया था. ऐसे में एक आशंका जताई जा रहा है कि वसुंधार की यात्रा यहां पहुंचने पर किसान प्रदर्शन कर सकते हैं.

किसानों ने की सुसाइड
अखिल भारतीय किसान सभा (AKS) के जिलाध्यक्ष दुली चंद ने इकॉनमिक टाइम्स से बात करते हुए कहा, हदोती में कृषि संकट की वजह से साल 2014 से लेकर अब तक 70 किसानों ने जान दी है. उन्होंने बताया, किसान यहां पीड़ित हैं. भारी बारिश की वजह से उड़द, तिल्ली और सोयाबीन की फसल नष्ट हो गई है. सरकार के वादे के बाद भी लहसून के गैर प्रबंधन से किसान पहले से परेशान हैं. यह किसानों के लिए दोहरी मार है. लहसून की भरमार होने से भी कई किसानों ने जान दी है.

मुख्यमंत्री से मिलेंगे किसान
दुली चंद के मुताबिक, किसान मुख्यमंत्री से मिलेंगे और नुकसान फसल के मुआवजे के लिए मांग करेंगे. इसके साथ ही लहसून के इंतजाम को लेकर बात करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर सरकार नहीं चेतेगी तो आशंका है कि और किसान सुसाइड करेंगे. दूसरी तरफ राज्य सरकार का कहना है कि किसान कृषि-संबंधी समस्याओं की वजह से सुसाइड नहीं कर रहे हैं. राज्य के कृषिमंत्री प्रभु लाल सैनी के मुताबिक, हर किसान के सुसाइड को कर्ज से जोड़कर देखना गलता है. ज्यादातर किसानों के सुसाइड के बाद पुलिस जांच में पता चलता है कि उन्होंने व्यक्तिगत या पारिवारिक कारणों से ये कदम उठाया था.

लहसून की बंपर पैदावर
बता दें कि राज्य में इस बार लहसून की बंपर पैदावर हुई है. इस मौसम में राज्य में 90 लाख क्विंटल लहसून की पैदावर हुई है. सरकार ने वादा किया था कि वह 15 लाख क्विंटल खुद खरीद लेगी, लेकिन उसने सिर्फ 7 क्विंटल ही खरीदा और किसानों को झटका देते हुए 30 जून को इस प्रक्रिया को बंद कर दिया.