पटना. बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला के चौथे मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर सोमवार को सीबीआई कोर्ट का फैसला आ गया. कोर्ट ने इस केस में भी लालू यादव को दोषी ठहराया है. वहीं, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को बरी कर दिया है. विमलकांत दास, सहित अजित कुमार वर्मा, अरुण कुमार सिंह, केके प्रसाद, मनोरंजन प्रसाद और नंद किशोर प्रसाद को भी दोषी करार दिया है.
अदालत ने जगन्नाथ मिश्रा के अलावा अधीप चौधरी, अजित कुमार वर्मा, एमसी सुवर्णो और बेनू झा को निर्दोष करार दिया है. Also Read - वीडियो कॉल पर मौजूद फैमिली के सामने लालू ने काटा केक, तेजस्वी बोले- 'पिता आज भी नहीं थके, हम भी लड़ते रहेंगे'

यह मामला दुमका कोषागार से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा के राशि की अवैध निकासी से जुड़ा है. इसमें बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत 31 आरोपी थे. बता दें कि लालू प्रसाद को इस अदालत ने देवघर के एक और चाईबासा के दो केस से जुड़े मामलों में दोषी पाया था. इसे लेकर राजद सुप्रीमो अभी जेल में हैं. Also Read - नीतीश राज को लालू यादव ने किया परिभाषित, इन 18 नामों के जरिए की शासन की व्याख्या

रघुवंस प्रसाद सिंह ने फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि जनता अब भी लालू यादव के साथ है. हम जनता की अदालत में जीत रहे हैं. सीबीआई इस मामले में अपने राजनीतिक आकाओं के दबाव में काम कर रही है. लालू यादव जरूर बरी होंगे. फैसला पक्षपातपूर्ण है. एक ही मामले में एक आदमी को बरी किया जाता है और एक आदमी को सजा दी जाती है. Also Read - RJD सुप्रीमो लालू यादव पर मंडरा रहा है COVID-19 का खतरा, रिम्स प्रशासन आज लेगा जांच का फैसला

आरजेडी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कहा, लालू के खिलाफ आया यह फैसला आखिरी नहीं है. हम ऊपरी अदालत में जाएंगे. उन्होंने ये भी कहा कि दिल्ली के एक जननेता को जब आप जनता की अदालत में परास्त नहीं कर पाते तो इस तरह के दांव-पेंज कर उन्हें शिकस्त देने की कोशिश करते हैं.

दुमका कोषागार से अवैध निकासी का यह है मामला
दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद समेत सभी 31 लोगों पर यह आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी बाउचर बनाकर करोड़ों रुपए कोषागार से निकाल लिए. आरोपियों ने 96 फर्जी बाउचर बनाए और इनके जरिए दिसंबर 1995 से लेकर जनवरी 1996 के बीच महज दो महीने में ही दुमका के कोषागार से 3 करोड़ 13 लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली. जबकि धन आवंटन की सीमा मात्र 50 हजार रुपए थी. इतनी बड़ी राशि की अवैध निकासी दुमका जिले के गांवों और कस्बों में पशुओं की खाद्य सामग्री, दवाओं और कृषि उपकरणों की खरीद के नाम पर की गई थी. इस मामले में लालू प्रसाद की ओर से सीबीआई कोर्ट में आवेदन देकर केस में बिहार के तत्कालीन एटोर्नी जनरल (एजी) को आरोपी बनाने की मांग की गई है.

तीन मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं लालू
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को चारा घोटाले के इससे पहले के तीन मामलों में कोर्ट दोषी करार दे चुका है. उन्हें कुल मिलाकर अब तक 13 साल से ज्यादा की सजा भी सुनाई जा चुकी है. इससे पहले चाईबासा कोषागार और देवघर कोषागार मामले में लालू प्रसाद के खिलाफ कोर्ट ने फैसला सुनाया था. बता दें कि सीबीआई की विशेष अदालत इस मामले में पहले 15 मार्च को ही फैसला सुनाने वाली थी. लेकिन इसे शुक्रवार तक टाल दिया गया था.