नई दिल्ली: राम मंदिर भूमि भूजन की पूर्व संध्या पर बीजेपी के वरिष्ट नेता लाल कृष्ण आडवाणी (lal Krishan Advani) ने बयान जारी कर कहा है कि 1990 में राम मंदिर आंदोलन में शरीक होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. बता दें कि पांच अगस्त को होने वाले भूमि पूजन में लाल कृष्ण आडवाणी को न्योता नहीं दिया गया. हालांकि इसके पीछे उनकी उम्र को वजह बनाया गया है. Also Read - बिहार विधानसभा चुनाव कब है? तारीख कब आएगी? मुख्य चुनाव आयुक्त ने बतायी ये बात

लालकृष्ण आडवाणी ने मंगलवार को कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राम मंदिर का आधारशिला रखना मेरे ही नहीं बल्कि सभी भारतीयों के लिए ऐतिहासिक और भावनात्मक दिन है.” उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि राम मंदिर सशक्त, संपन्न और सौहार्दपूर्ण राज्य के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा जहां पर सभी को न्याय मिलेगा और कोई अलग-थलग नहीं होगा.” आडवाणी ने आगे कहा कि भगवान राम विनीत भाव, मर्यादा और शिष्टता के गुणो से युक्त हैं और मेरा मानना है कि यह मंदिर सभी भारतीयों को उनके गुणों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करेगा. Also Read - महिलाओं संग अपराध करने वालों के पोस्टर लगवाएगी योगी सरकार, आदेश जारी

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “मैं यह महसूस करता हूं कि राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान, भाग्य ने मुझे 1990 में सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा के रूप में एक महत्वपूर्ण कर्तव्य निभाया, जिसने अपने अनगिनत प्रतिभागियों की आकांक्षाओं, ऊर्जाओं और जुनून को मजबूत करने में मदद की.” उन्होंने कहा, “मैं विनम्रता से भर जाता कि नियति ने राम जन्मभूमि आंदोलन में वर्ष 1990 में राम रथ यात्रा के माध्यम से मुझे महत्वपूर्ण दायित्व निभाने का मौका दिया.” Also Read - Delhi Riots: कोर्ट ने उमर खालिद को न्यायिक हिरासत में भेजा, UAPA समेत कई गंभीर धाराएं लगी हैं

पूर्व उप प्रधानमंत्री ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि उनका मानना है कि राम मंदिर एक शांतिपूर्ण सौहार्दपूर्ण राष्ट्र के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा जहां सबके लिए न्याय होगा और कोई भी बहिष्कृत नहीं होगा, ताकि देश ‘‘राम राज्य’’ की ओर अग्रसर हो, जो ‘‘सुशासन का प्रतिमान’’ है. उल्लेखनीय है कि 92 वर्षीय आडवाणी को कोरोना महामारी के मद्देनजर उनकी उम्र को देखते हुए शिलान्यास समारोह के लिए आमंत्रित सदस्यों की सूची में नहीं रखा गया है.