नई दिल्ली. कवि, साहित्यकार, पत्रकार, राजनेता और पूर्व प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी के कई रूप हैं, जो उन्हें सच्चे मायने में People’s Prime Minister बनाते हैं. यही वजह है कि सियासत से इतर जब वाजपेयी आम लोगों के बीच होते थे, तो वे आम नागरिक की तरह उत्साह, हर्ष, विलास, भावनात्मक रूप में नजर आया करते थे. आज जब राजनेताओं को भारी-भरकम सुरक्षा घेरे में सिमटा हुआ और आम लोगों से दूर रहकर आम लोगों की बात करते हुए देखा जाता है, ऐसे समय में भी अटल बिहारी वाजपेयी की छवि एक सच्चे जननेता की थी. चाहे चुनावी रैलियां हों या कोई सभा, साहित्य का मंच हो या कवि सम्मेलन, अटल बिहारी वाजपेयी अलग-अलग रूपों में नजर आते थे. चुनावी रैलियों में जहां उनके भीतर का राजनेता लोगों के सामने होता था, वहीं कवि सम्मेलनों में वे श्रोताओं से सामंजस्य बिठाते नजर आते थे. ऐसा ही एक वीडियो होली के त्योहार का है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नृत्य करते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यक्रम में तत्कालीन पार्टी कार्यकर्ता और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात का वीडियो, एक नेता और कार्यकर्ता से ज्यादा सहयोगी का नजर आता है. आप भी देखें ये वीडियो. Also Read - अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन में हुए खर्च का भुगतान करेगी योगी सरकार, विवाद बढ़ा तो उठाया कदम

राजनीति को लेकर स्पष्ट थे विचार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कई लेखों, साक्षात्कारों और सार्वजनिक समारोहों में राजनीति से खुद को अलग न कर पाने की पीड़ा व्यक्त की थी. वे कहते थे कि राजनीति की राह रपटीली होती है. इस पर बहुत सोच-समझकर चलना होता है. इसलिए इन राहों पर बहुत अधिक संतुलन बनाए रखना होता है. आज की राजनीति और नेताओं के स्तर को लेकर भी वाजपेयी ने अपने विचार कई बार स्पष्ट किए थे. उन्होंने कहा था कि आज की राजनीति विवेक नहीं, बल्कि वाक्-चातुर्य चाहती है. यह संयम और श्रेय नहीं, बल्कि प्रेय के पीछे पागल है. नेताओं में आपसी मतभेद का समादर करना तो अलग रहा, उसे सहन करने की आदत भी खत्म हो रही है. वाजपेयी ने कहा था कि आज की राजनीति में सक्रिय नेता या कार्यकर्ता, सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं. उत्तराधिकार की शतरंज पर मोहरे बैठाने की चिंता में लीन हैं.