नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने विकास दुबे मुठभेड़ कांड (Vikas Dubey encounter case) और आठ पुलिसकर्मियों के नरसंहार की घटनाओं की जांच के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.एस. चौहान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच आयोग के गठन पर सवाल उठाने वाली याचिका बुधवार को खारिज कर दी.Also Read - यूपी: भेलपूरी बेचने वाले ने 5 करोड़ रुपए ठगे, 300 लोगों को इस तरह बनाया शिकार

चीफ जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की तीन सदस्यीय पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि कानुपर में हुई मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं. Also Read - Delhi Pollution: दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण, नाराज हुए विधानसभा अध्यक्ष, कहा-मेरी बीवी एक महीने से घर के बाहर नहीं निकली

शीर्ष अदालत ने 11 अगस्त को अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की याचिका पर सुनाई के दौरान उन्हें मीडिया की खबरों के आधार पर जांच आयोग की अध्यक्षता कर रहे सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर लांछन लगाने की अनुमति नहीं दी. Also Read - Rajasthan REET Exam 2021: अगर हुआ ऐसा तो अटक जाएगी 31000 शिक्षकों भर्ती, जानें क्या है बीएड-बीएसटीसी विवाद

पीठ ने शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश डॉ. बलबीर सिंह चौहान, हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश शशिकांत अग्रवाल और उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक के एल गुप्ता की सदस्यता वाले जांच आयोग के पुनर्गठन के लिए उपाध्याय की याचिका पर यह फैसला सुनाया.

अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने आरोप लगाया था कि न्यायमूर्ति डॉ. चौहान के भाई उत्तर प्रदेश में विधायक हैं, जबकि उनकी पुत्री का विवाह एक सांसद से हुआ है.

इस जांच आयोग को कानपुर के चौबेपुर थाने के अंतर्गत बिकरू गांव में तीन जुलाई को आधी रात के बाद विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस की टुकड़ी पर घात लगाकर किए गए हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मियों के मारे जाने की घटना की जांच करनी है.

इसके अलावा आयोग को 10 जुलाई को विकास दुबे की मुठभेड़ में मौत की घटना और इससे पहले अलग-अलग मुठभेड़ में दुबे के पांच साथियों के मारे जाने की घटना की जांच करनी है.