नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह विकास दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ों में मौत के मामले में प्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों के विस्तृत विवरण के साथ एक स्थिति रिपोर्ट पेश करेगी. Also Read - SSR Case: बिहार पुलिस ने पूछा, बिना FIR दर्ज किए मुंबई पुलिस जांच कैसे कर रही थी?

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह दुबे और उसके सहयोगियों की मुठभेड़ में मौत के साथ ही गैंगस्टर द्वारा आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले की जांच के लिये पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने पर विचार कर सकती है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट का आदेश- प्रशांत भूषण के कोर्ट के अवमानना मामले में होगी सुनवाई,

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि वह इस मामले में 16 जुलाई तक स्थिति रिपोर्ट पेश करेंगे. शीर्ष अदालत ने कहा कि दुबे और उसके सहयोगियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामलों की न्यायालय की निगरानी में जांच के लिये दायर याचिकाओं पर 20 जुलाई को सुनवाई की जायेगी. Also Read - ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रुजुएशन की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं होंगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में तीन जुलाई की रात विकास दुबे को गिरफ्तार करने गयी पुलिस की टुकड़ी पर घात लगाकर किये गये हमले में पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गये थे. पुलिस की इस टुकड़ी पर विकास दुबे के घर की छत से गोलियां बरसाईं गयीं थीं.

विकास दुबे 10 जुलाई की सुबह कानपुर के निकट भौती इलाके में पुलिस मुठभेड़ में उस समय मारा गया जब उसने कथित तौर पर पुलिस की दुर्घनाग्रस्त गाड़ी से निकल कर भागने का प्रयास किया. उप्र पुलिस इसी गाड़ी में विकास दुबे को उज्जैन से कानपुर ला रही थी.

(इनपुट भाषा)