नई दिल्‍ली: यूपी के कानपुर एनकाउंटर के मुख्‍य आरोपी विकास दुबे व उसके साथियों की तथाकथित पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर जांच में आज सुनवाई हुई. इस दौरान शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि एक अपराधी के खिलाफ इतने मामले दर्ज होने के बावजूद उसे जमानत मिलने से वह ”स्तब्ध” है. पीठ ने कहा, ” हम इस बात से चकित हैं कि विकास दुबे जैसे व्यक्ति को इतने सारे मामलों के बावजूद जमानत मिल गई. पीठ ने कहा, ” यह संस्थान की विफलता है कि जिस व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए, उसे जमानत मिली. Also Read - पीएम मोदी ने बनारस के जिन गांवों को लिया गोद, वहां ले जाए जाएंगे विदेशी पर्यटक, ये है CM योगी का प्लान

शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा, एक राज्य के तौर पर आपको विधि का शासन बनाए रखना होगा. कोर्ट ने यूपी सरकार से एक जांच समिति में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट के एक जज और एक रिटायर्ड टॉप पुलिस अफसर को शामिल करने के लिए कहा है. कोर्ट में यूपी सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह जांच समिति के बारे में दिए गए सुझावों को शामिल करके नई अधिसूचना का मसौदा 22 जुलाई को पेश कर देगी. Also Read - चलती बस में महिला संग सामूहिक दुष्कर्म? महीने भर में तीसरी बार घटी ऐसी घटना

शीर्ष कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से कहा, एक राज्य के तौर पर आपको विधि का शासन बनाए रखना होगा, ऐसा करना आपका कर्तव्य है. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें दुबे और उसके कथित सहयोगियों की मुठभेड़ों की अदालत की निगरानी में जांच कराने का अनुरोध किया गया है. पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि वह शीर्ष अदालत के किसी पीठासीन न्यायाधीश को जांच समिति का हिस्सा बनने के लिए उपलब्ध नहीं करा सकती.

यूपी सरकार की ओर से सालिसटीर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर आवश्यक निर्देश प्राप्त करने और उससे न्यायालय को अवगत कराने के लिए कुछ वक्त चाहिए. पीठ ने सॉलीसीटर जनरल से कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कोई बयान देते है और इसके बाद कुछ होता है तो आपको इस पर गौर करना होगा.

कानपुर के चौबेपुर इलाके के बिकरू गांव में तीन जुलाई की मध्यरात्रि दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस की टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया गया था जिसमें डीएसपी देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी. पुलिस के मुताबिक दुबे की 10 जुलाई की सुबह हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी, जब उसे उज्जैन से कानपुर ले जा रहा पुलिस वाहन भौती इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसने मौके से भागने की कोशिश की थी. मुठभेड़ में दुबे के मारे जाने से पहले उसके सभी पांच कथित सहयोगियों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया था.