नई दिल्ली. थोब्जी का खेड़ा गांव. उदयपुर जिला मुख्यालय से 30 किमी की दूरी पर और ग्राम पंचायत से 10 किमी की दूरी पर है. गांव के लोग नेताओं की उदासीनता से काफी नाराज हैं और इस बार निर्णय लिए हैं कि वह वोट नहीं देने जाएंगे. इसके पीछे उनका तर्क है कि वह अपने मुद्दे, परेशानी या जरूरतों को ‘ग्राम सभा’ तक नहीं पहुंच पाते. Also Read - यूपी के मंत्री ने कहा- कांग्रेस ने भ्रम फैलाकर पाया वोट, पछता रहे हैं मध्यप्रदेश के लोग

गांव मावली विधानसभा में पड़ता है. गांव में 80 परिवार रहता है और उसकी कुल आबादी 600 से ज्यादा है. वे रोड कनेक्टिविटी के साथ-साथ पानी जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं. लोगों को कहना है कि उन्हें पता ही नहीं होता है कि ग्राम सभा कब लगेगी. और मालूम भी होता है तो वह इतनी दूर लगता है कि वे पहुंच नहीं पाते हैं. इसके पीछे की वजह है कि हाईवे से गांव की दूरी लगभग 15 किमी है और उसकी कोई बेहतर कनेक्टिविटी भी नहीं है. Also Read - एमएनएफ के प्रमुख जोरमथंगा ने ली मिजोरम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ

कष्टदायक स्थिति में रहते हैं
गांव के लोगों को कहना है कि बहुत ही कष्टदायक स्थिति में रहते हैं. उनका कहना है कि जिला मुख्यालय से तो उनकी दूरी है ही ग्राम पंचायत से भी वे लोग 10 किमी दूर रहते हैं. उनका कहना है कि चार दूसरे ग्राम पंचायत हैं जिनसे उनकी दूरी 1-2 किमी ही है, लेकिन उसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया है. Also Read - सवाल- केंद्र की राजनीति में जाने वाले हैं? 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह का जवाब- 'यहीं हूं मैं'

नेताओं से नाराज
गांव के लोगों को कहना है कि पहले उनका गांव एक नजदीक के पंचायत में आता था. लेकिन नए सीमांकन के बाद यह नामरी में आने लगे. उनका कहना है कि उन्होंने नेताओं से कई बार कहा है कि उनकी पंचायत को बदल दिया जाए, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. उनका कहना है कि हर चुनाव में लोग आकर वोट मांगते हैं और फिर चले जाते हैं. इस बार उन लोगों ने निर्णय लिया है कि उनकी पंचायत नहीं बदली जाएगी तो वोट नहीं देंगे.