नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हुए हमलों की पृष्ठभूमि में मंगलवार को केंद्र और गुजरात सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की और कहा कि प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ता से कार्रवाई की जाए. उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य में कारखानों के बंद होने से बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है और इस वजह से युवाओं के बीच हताशा और गुस्सा बढ़ रहा है. गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ‘समूचे गुजरात में खराब आर्थिक नीतियों, नोटबंदी और जीएसटी को सही ढंग से लागू नहीं करने की वजह से उद्योग तबाह हो गए हैं. नतीजा यह हुआ है कि कारखाने एवं औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई हैं जिससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी पैदा हो गई है.’

उन्होंने कहा, ‘रोजगार सृजन की सरकार की अक्षमता के कारण युवाओं में हताशा और गुस्सा बढ़ रहा है. यही गुस्सा और हताशा पूरे गुजरात में प्रवासियों पर हिंसक हमलों में प्रकट हो रही है. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘ प्रवासी कामगार हमारी आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं. उन पर हमले भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं जो कारोबार और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है. उन्होंने कहा, ‘सरकार दृढ़ता से कार्रवाई करे और शांति बहाल करने और हर भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वह हर संभव प्रयास करे.

गौरतलब है कि गत 28 सितंबर को गुजरात के साबरकांठा जिले में 14 महीने की एक बच्ची के साथ कथित बलात्कार के बाद छह जिलों में हिंदी भाषी लोगों पर हमलों की कई घटनाएं हुई हैं. राज्य सरकार का कहना है कि हिंसा की घटनाओं के सिलसिले में 400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. बलात्कार के मामले में बिहार के एक प्रवासी श्रमिक को गिरफ्तार किए जाने के बाद हिंसा की शुरुआत हुई थी.

हिंसा भड़काने में कांग्रेस के नेता अल्पेश ठाकोर का भी नाम आ रहा है. हालांकि राहुल गांधीअल्पेश के मामले में चुप हैं. इससे पहले राहुल ने ट्वीट कर गुजरात सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साथा था. राहुल ने ट्वीट किया था, ग़रीबी से बड़ी कोई दहशत नहीं है. गुजरात में हो रहे हिंसा की जड़ वहां के बंद पड़े कारखाने और बेरोजगारी है. व्यवस्था और अर्थव्यवस्था दोनों चरमरा रही है. प्रवासी श्रमिकों को इसका निशाना बनाना पूर्णत ग़लत है| मैं पूरी तरह से इसके ख़िलाफ़ खड़ा रहूंगा.