नई दिल्लीः तीस हजारी अदालत परिसर में पार्किंग को लेकर पुलिस और वकीलों में हुई झड़प में लगभग 80 विचाराधीन कैदी फंस गए. पुलिस ने बताया कि सुनवाई के लिए अदालत लाए गए इन कैदियों को शाम तक लॉकअप में बंद रखा गया. शाम करीब छ बजे जब स्थिति पर काबू पाया गया तब इन कैदियों को सुरक्षित बारी बारी से तिहाड़ जेल भेज दिया गया. पुलिस ने जानकारी ने दी रात के बाद से अब स्थिति नियंत्रण में और इस घटना की जांच की जा रही है.

अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शनिवार को दोपहर में पुलिस और वकीलों के बीच झड़प हो गयी. इस झड़प के दौरान 17 वाहनों में तोड़फोड़ की गई. इस झड़प में दो थाना प्रभारियों और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त समेत 20 लोग घायल हो गए. झगड़े के दौरान एक वकील को पुलिस द्वारा हवा में चलाई गई गोली भी लगी है. मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने क्राइम ब्रांच की एक एसआईटी (SIT) गठित कर दी है. एसआईटी का प्रमुख विशेष आयुक्त स्तर के पुलिस अधिकारी को बनाया गया है.

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बार एसोसिएशनों ने घटना की निंदा की और सोमवार तक राष्ट्रीय राजधानी की सभी जिला अदालतों में एक दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया . झड़प के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों और दंगा रोधी वाहनों को तैनात किया गया. बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष के सी मित्तल ने कहा, ‘‘हम तीस हजारी अदालत में पुलिस द्वारा वकीलों पर बर्बर और बिना किसी उकसावे के हमले की कड़ी निंदा करते है. एक वकील की हालत नाजुक है. हवालात में एक वकील को पीटा गया. पुलिस ने घोर लापरवाही दिखायी. उन्हें बर्खास्त करना चाहिए और उनपर मुकदमा चलना चाहिए. हम दिल्ली के वकीलों के साथ खड़े हैं.’’

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दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस एसएन ढींगरा ने शनिवार देर शाम आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आज की घटना ने करीब 31 साल पहले  जब पूर्व आईपीएस किरण बेदी और दिल्ली पुलिस के बीच हुए बबाल की की घटना को सामने ला दिया. उन्होंने कहा वह भी एक ऐसी घटना थी जिसे भुलाया नहीं जा सकता. उस जमाने में ढींगरा तीस हजारी अदालत में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सेशन जज थे. एस.एन. ढींगरा ने आईएएनएस से कहा, “भारत में ज्यादातर वकील मानते हैं कि जैसे बस वे ही कानून, जज और अदालत हैं. अधिकांश वकील सोचते हैं कि मानो कानून वकीलों से चलता है, न कि जज-अदालत और संविधान से. जबकि हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है.