नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा का गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों को साबित करता है. यह बात प्रवासी भारतीय सम्मान के एक विजेता ने कही. वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस में प्रवासी भारतीय सम्मान पाने वाले अनिल सूकलाल ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच संबंध 1994 में तत्कालीन राष्ट्रपति नेलसन मंडेला के शासनकाल में तेजी से विकसित हुए हैं.

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प्रवासी भारतीय
रामफोसा, दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेलसन मंडेला के बाद, गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इस देश से आमंत्रित दूसरे नेता हैं. भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच संबंधों को मजबूत बनाने के वास्ते जीवनपर्यंत योगदान देने के लिए वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस में प्रवासी भारतीय सम्मान पाने वाले अनिल सूकलाल ने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच संबंध 1994 में तत्कालीन राष्ट्रपति नेलसन मंडेला के शासनकाल में तेजी से विकसित हुए हैं.

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उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस के मौके पर रामफोसा की मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय दक्षिण अफ्रीका को ले कर गंभीर हैं. साथ ही राष्ट्रपति रामफोसा का, भारत के इस आमंत्रण को स्वीकार करना यह साबित करता है कि दक्षिण अफ्रीका इस संबंध को बहुत महत्व देता है. पिछले साल 69वें गणतंत्र दिवस पर 10 आसियान देशों के नेताओं ने परेड में हिस्सा लिया था. 2017 में अबु धाबी के वली अहद शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और 2016 में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि थे. वहीं 2015 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और 2014 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे समारोह के मुख्य अतिथि थे. 2013 में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांग्चुक यहां पहुंचे थे. नेल्सन मंडेला 1995 में गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत करने भारत आए थे.

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