नई दिल्ली। आगामी अप्रैल और मई में खाली हो रही राज्यसभा की 58 सीटों के लिए 23 मार्च को द्विवार्षिक चुनाव होगा. निवार्चन आयोग ने आज इन सीटों का चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुए यह जानकारी दी. आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार संसद के उच्च सदन की 16 राज्यों में खाली हो रही 58 सीटों के लिये निर्वाचन प्रक्रिया पांच मार्च को चुनाव अधिसूचना जारी होने के साथ शुरू होगी. इन सीटों पर चुनाव के लिये 23 मार्च को मतदान कराया जायेगा और उसी दिन मतगणना भी होगी.

इसी के साथ केरल से राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव भी होगा. यह सीट जदयू सदस्य एम पी वीरेन्द्र कुमार के पिछले साल 20 दिसंबर को इस्तीफे के कारण खाली हुई थी. आयोग द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक 13 राज्यों से 50 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल आगामी दो अप्रैल को, दो राज्यों (उड़ीसा और राजस्थान) से छह राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल तीन अप्रैल और झारखंड से दो सदस्यों का कार्यकाल तीन मई को समाप्त हो रहा है. इनमें उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक 10 सदस्यों का कार्यकाल दो अप्रैल को खत्म हो रहा है. वहीं महाराष्ट्र और बिहार से छह-छह, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल से पांच-पांच, गुजरात और कर्नाटक से चार चार सदस्यों का कार्यकाल इसी दिन पूरा होगा.

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चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तारीख 12 मार्च तय की गई है. वहीं, नामांकन पत्रों की जांच 13 मार्च को होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 15 मार्च है. मतदान 23 मार्च को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक होगा और शाम पांच बजे मतगणना होगी. आयोग ने साफ किया कि मतपत्रों के माध्यम से होने वाले मतदान के दौरान मतदाताओं को निर्वाचन केंद्र पर मौजूद निर्वाचन अधिकारी द्वारा खास पेन मुहैया कराया जाएगा. मतदाता सिर्फ इसी पेन से अपनी पसंद के उम्मीदवार को मत दे सकेंगे. किसी अन्य पेन के इस्तेमाल वाले मतपत्र को अमान्य श्रेणी में रखा जाएगा.

जेटली-प्रसाद-जावड़ेकर जैसे दिग्गज शामिल

अप्रैल में जिनका कार्यकाल पूरा होगा उनमें केन्द्रीय अरूण जेटली, जेपी नड्डा, रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी, राजीव शुक्ला, रेणुका चौधरी तथा मनोनीत सदस्य रेखा एवं सचिन तेंदुलकर शामिल हैं. अप्रैल माह में बीजेपी के 17, कांग्रेस के 12, सपा के छह, बसपा, शिवसेना, माकपा के एक-एक, जदयू, तृणमूल कांग्रेस के 3-3, तेदेपा, राकांपा, बीजद के 2-2 निर्दलीय तथा मनोनीत तीन सदस्य का कार्यकाल पूरा होने जा रहा हैं. बीजेपी इस बार उत्तर प्रदेश से अपनी सीटों की संख्या में बढोतरी करेगी जबकि कांग्रेस को गुजरात और महाराष्ट्र से ही सीट मिलेंगी. गुजरात से रिटायर को रहे चार में से दो कांग्रेस को मिलने की उम्मीद है जबकि महाराष्ट से उसके रिटायर को रहे दो सदस्यों में से एक को वह वापस ला पाएगी.

बीजेपी के लिए बेहद अहम

बता दें कि राज्यसभा चुनाव सियासी दलों के लिए बेहद अहम हैं. खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के लिए क्योंकि लोकसभा में उसे पूरा बहुमत हासिल है, लेकिन राज्यसभा में वह अल्पमत है. यही वजह है कि सरकार के कई महत्वपूर्ण बिलों को राज्यसभा में मंजूरी नहीं मिल पाती है. तीन तलाक बिल का मामला ऐसा ही था जो लोकसभा में तो आसानी से पास हो गया, लेकिन राज्यसभा में कम बहुमत के कारण अटक गया. हालांकि राज्यसभा चुनाव के नतीजे पहले से ही तय होते हैं और उलटफेर कम ही देखने को मिलता है.

चुनाव के बाद बीजेपी की स्थिति राज्यसभा  में बीजेपी की स्थिति सुधरेगी. खासतौर पर यूपी से उसे बड़ा फायदा होगा जहां उसने पिछले साल प्रचंड जीत हासिल की थी. यहां से 10 सांसदों का चुनाव होना है. इसी तरह महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में भी उसे फायदा होगा. हालांकि गुजरात में कम सीटों के चलते थोड़ा नुकसान भी होगा.  बहरहाल, बीजेपी के लिए राज्यसभा चुनाव फायदेमंद ही साबित होगा और उसे ऊपरी सदन में अपना संख्याबल बढ़ाने में मदद मिलेगी.