नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट दो नवंबर को मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता वृंदा करात की एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें एक ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. वृंदा करात ठाकुर और वर्मा के इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में हिंसा के दौरान कथित घृणित भाषणों को लेकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रही हैं. Also Read - हंगामे के बीच चार बार स्थगित हुई लोकसभा की कार्यवाही, संसद में लगे ‘अनुराग ठाकुर माफी मांगो’ के नारे

वकील तारा नरुला, आदित एस. पुजारी और अपराजिता सिन्हा के माध्यम से दायर याचिका को न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया. न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने दलीलें सुनने के बाद दोनों पक्षों यानी वृंदा के वकील और दिल्ली पुलिस को अपनी दलीलों के समर्थन में संबद्ध निर्णय दाखिल करने को कहा. इसके बाद अदालत ने मामले को 2 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया. Also Read - अदालत ने अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई टाली

करात ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट द्वारा 26 अगस्त को दिए गए आदेश को चुनौती दी, जिसमें दोनों नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था. वृंदा ने अदालत में दावा किया कि ठाकुर और वर्मा के खिलाफ एक सं™ोय अपराध का मामला बनता है. Also Read - बांग्ला एक्ट्रेस ने छोड़ी भाजपा, कहा- अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा जैसों के साथ नहीं रह सकती

संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, करात की ओर से पेश अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने अदालत को बताया कि निचली अदालत ने मामले को लगभग नौ महीने तक लंबित रखा और यहां तक कि उन्होंने मामले के गुण-दोष पर भी विचार नहीं किया और इसे खारिज कर दिया.

माकपा नेता वृंदा करात और के.एम. तिवारी ने निचली अदालत में शिकायत दायर कर संसद मार्ग पुलिस थाने को ठाकुर और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था. हालांकि, निचली अदालत ने कहा था कि शिकायत पूर्व अनुमति के बगैर स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है.