नई दिल्ली: अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलि‍कॉप्टर खरीद के 3,600 करोड़ रुपए से जुड़े धन शोधन मामले में आरोपी राजीव सक्सेना ने बुधवार को दिल्ली की एक अदालत में अर्जी देकर सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई. विशेष न्यायाधीश अरविन्द कुमार ने सरकारी गवाह बनने की सक्सेना की अर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है. अदालत इस अर्जी पर गुरुवार को सुनवाई करेगी.

गिरफ्तारी के बाद अब जमानत पर राजीव सक्सेना अदालत में मौजूद थे. उन्होंने सीधे अपनी अर्जी देते हुए कहा कि उन्होंने स्वत: अपनी इच्छा से और बिना किसी के दबाव में आए यह अर्जी दी है. उन्होंने अनुरोध किया कि अगर उन्हें वायदामाफ गवाह बनाया जाएगा तो अदालत के समक्ष वह इस संबंध में सभी तथ्यों का खुलासा करेंगे.

अपनी अर्जी में उन्होंने कहा, ”मैं विनम्रतापूर्वक बिना किसी पूर्वाग्रह के अदालत से अनुरोध करता हूं कि उन्हें आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 306 के तहत माफी दी जा सकती है, जिसमें यह शर्त है कि वायदामाफ गवाह बनने की स्थिति में मामले से संबंधित उनके पास जो भी जानकारी है उन तथ्यों का वह खुलासा करेंगे.” सक्सेना ने कहा कि वह शुरुआत से ही जांच में सहयोग कर रहे हैं और मामले से संबंधित जो तथ्य उन्हें ज्ञात थे, उसकी उन्होंने जानकारी दी.

अर्जी में कहा गया, याचिकाकर्ता ने प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत के दौरान जांच में पूरी तरह से सहयोग किया. सक्सेना को इससे पहले एम्स द्वारा जारी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने जमानत दी थी.

दुबई से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद 31 जनवरी से सक्सेना हिरासत में थे. अपनी अर्जी में उन्होंने कहा था कि मामले में जब गौतम खेतान, ऋतु खेतान और एसपी त्यागी समेत सभी अन्य आरोपियों को जमानत दी जा सकती है तब उन्हें ऐसी राहत नहीं देना उनके साथ अन्याय है. सक्सेना दुबई स्थित कंपनी यूएचवाई और मैट्रिक्स होल्डिंग्स के निदेशक हैं. वह अगस्तावेस्टलैंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर आरोप पत्र में नामित आरोपियों में से एक हैं.

क्रिश्चियन मिशेल, अगस्तावेस्टलैंड और फिनमेकेनिका के पूर्व निदेशकों गिसेप ओरसी और ब्रुनो स्पांगनोलिनी, वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस.पी. त्यागी और सक्सेना की पत्नी शिवानी का नाम जांच एजेंसी ने अपने अरोप पत्र में शामिल किया है.