जयपुर. राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अश्विनी भगत ने शुक्रवार को कहा कि संपूर्ण प्रदेश में पहली बार वीवीपैट और ईवीएम एम-3 मशीनों के जरिए मतदान कराया जाएगा. नई तकनीक से मतदान सुगम, सहज होने के साथ और अधिक पारदर्शी तथा निष्पक्षता के साथ सम्पन्न कराया जा सकेगा. भगत ने ईवीएम और वीवीपैट की प्रथम स्तरीय जांच (एफएलसी) के संबंध में आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में पहली बार 52 हजार से ज्यादा मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. ऐसे में निर्वाचन से जुड़े सभी अधिकारी प्रशिक्षण के बाद बेहतर परिणाम दे पाएंगे.

उन्होंने कहा कि राज्य में होने वाले चुनाव के लिए आयोग से दो लाख ईवीएम और वीवीपैट मशीनें मंगवाई जा रही हैं. कार्यशाला में हाल ही कर्नाटक में चुनाव सम्पन्न कराकर आए उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचन आयोग के मास्टर ट्रेनर राघवेंद्र ने एम-3 ईवीएम और वीवीपैट के बारे में सभी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अधिकारी एफएलसी के दौरान राजनैतिक दलों की मौजूदगी सुनिश्चित करें ताकि किसी भी प्रकार की शंका पैदा ना होने पाए.

इस दौरान भारत निर्वाचन आयोग से आए मधुसूदन गुप्ता ने सभी अधिकारियों को आश्वस्त किया कि ईवीएम मशीनें किसी भी नेटवर्क या वायरलैस उपकरणों से जुड़ी नहीं होती, इसलिए इनमें हेराफेरी या हैकिंग किसी भी तरह संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अधिकारी राजनैतिक दलों और आमजन में और अधिक जागरूकता लाने के लिए प्रचार-प्रसार करें ताकि लोकतंत्र के इस उत्सव के प्रति किसी के मन में कोई शंका न रहे.

भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड बेंगलुरू से आए इंजीनियर नागराज जी. ने एफएलसी के बारे में तकनीकी पक्ष रखते हुए अधिकारियों को ‘क्या करें-क्या ना करें‘ की विशेष चेकलिस्ट को भी साझा किया.