मध्यप्रदेश के व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) के माध्यम से MBBS की पढ़ाई करने वाले 634 छात्रों के मामले में बुधवार को सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए और सीबीआई को फटकार लगाते हुए पूछा है कि व्यापम में 2008 से 2012 तक के बीच मामलों की जांच अब तक क्यों नहीं की? Also Read - Coronavirus Effect: भोपाल व जबलपुर में गरीबों को मिलेगा एक माह का नि:शुल्क राशन

कोर्ट ने पूछा है कि जो शिकायतें दर्ज की गईं थी, उनका क्या हुआ और सीबीआई को साफ कहा कि जब सारे मामलों की जांच के लिए कहा गया था तो ये भी उसी का हिस्सा हैं। कोर्ट ने सीबीआई से यह भी पूछा कि 2008 से 2012 के दौरान क्या किसी छात्र के खिलाफ कार्रवाई हुई। यह भी पढ़ें: यह भी पढ़ें: व्यापम घोटाला: सीबीआई ने 4 प्राथमिकी में 58 को आरोपी बनाया Also Read - कमलनाथ ने मप्र के राज्यपाल से की मुलाकात, कहा- मेरी सरकार सदन में शक्ति परीक्षण के लिए हैं तैयार  

सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने मंगलवार को कहा था कि ये तो साफ है कि इन छात्रों ने घूस देकर कॉलेज में दाखिला लिया और पढ़ाई की है। यानी आपने उन छात्रों की जगह ली जो सही तरीके से दाखिला लेकर पढ़ाई कर सकते थे। Also Read - मध्यप्रदेश में राज्यपाल ने अभिभाषण के बाद बहुमत साबित करने का दिया निर्देश

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल यह है कि क्या कोर्ट अपने संविधान द्वारा दिए गए प्रावधान 142 का अधिकार का इस्तेमाल कर इन छात्रों को रियायत दे दें। या फिर कोर्ट ये तय करे कि इस तरीके से धोखाधड़ी करने वालों को कोई छूट नहीं दी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने व्यापम मामले की सुनवाई करते हुए आज एक अहम टिप्पणी भी कही और कहा, व्यापम घोटाला राष्ट्रीय स्तर का है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यापम घोटाला हमें बेहद चौंका रहा है क्योंकि साल दर साल घोटाले होते रहे हैं। यह भी पढ़ें: व्यापमं घोटाला बनाम ‘बरमूडा ट्राइएंगल’

ये मामला किसी नौजवान बच्चे की रोटी चुराने का नहीं है। हमने हमेशा छात्रों का साथ दिया है, लेकिन यहां तो हर साल घोटाले हुए हैं। अगर ऐसे घोटालों पर हम अपनी आंखें बंद किए रहेंगे तो ये रुकेंगे ही नहीं।

कोर्ट ने कहा कि लोग देश के अलग-अलग कोने से आकर परीक्षा देते हैं और घोटाले के जरिये वे चुन भी लिए जाते हैं, लेकिन उन छात्रों का क्या जो पूरे साल कड़ी मेहनत करते हैं और इन घोटालों की वजह से उनका चुनाव नहीं हो पाता।

ये मामला केवल सामूहिक नक़ल का नहीं है यहां तो रोल नंबर भी बदले गए हैं। ये एक सामूहिक घोटाले की ओर इशारा करता है। व्यापम घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए हैं।

कोर्ट ने कहा कि बुधवार को राज्य सरकार को इन सवालों के जवाब देने होंगे। हमें बताएं कितने घोटाले व्यापम की तरह राज्य में हुए हैं। हमें पटवारी से लेकर पीसीएस की भर्ती तक की जानकारी चाहिए।

अगर कोई ऐसा घोटाला हुआ है तो उसकी पूरी जानकारी राज्य सरकार हमें दे। राज्य सरकार को ये भी बताना होगा कि अगर घोटाले हुए हैं तो उनकी जांच कहां तक पहुंची है।

इसके अलावा कोर्ट ने सीबीआई से पूछा है कि व्यापम घोटाले की जांच कहां तक पहुंची है और वो कब तक पूरी हो जाएगी?

News Source: NDtv