इंदौर: बहुचर्चित घटनाक्रम के दौरान पाकिस्तान से तीन साल पहले स्वदेश लौटी मूक-बधिर युवती गीता के माता-पिता का अब तक पता नहीं चल सका है. हालांकि, उसके परिवार की खोज के लिए भारत सरकार के प्रयास वर्ष 2018 में भी जारी रहे. अब तक जितने लोगों ने भी गीता को उनके परिवार का हिस्सा बताया कोई भी अपने दावों को साबित नहीं कर सका.

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गीता मध्यप्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय और नि:शक्त कल्याण विभाग की देख-रेख में इंदौर की एक गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर में रह रही है. इस विभाग के संयुक्त निदेशक बीसी जैन ने पुष्टि की कि मूक-बधिर युवती के माता-पिता की खोज के लिए सरकार की कोशिशें अब भी जारी हैं. हालांकि अभी तक इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है. हालांकि पिछले तीन साल के दौरान देश के अलग-अलग इलाकों के 10 से ज्यादा परिवार गीता को अपनी लापता बेटी बता चुके हैं. लेकिन जांच में इनमें से किसी भी परिवार का इस मूक-बधिर युवती पर दावा साबित नहीं हो सका है.

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याद दिला दें गीता सात-आठ साल की उम्र में पाकिस्तानी रेंजर्स को समझौता एक्सप्रेस में लाहौर रेलवे स्टेशन पर मिली थी. गलती से सरहद पार पहुंचने वाली यह लड़की भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण गीता 26 अक्तूबर 2015 को स्वदेश लौटी. स्वराज ने 20 नवंबर को यहां मीडिया से बातचीत के दौरान गीता को “हिंदुस्तान की बेटी” बताते हुए स्पष्ट किया कि देश में उसके परिवारवाले मिलें या न मिलें, वह दोबारा पाकिस्तान कभी नहीं भेजी जायेगी. उसकी देखभाल भारत सरकार ही करेगी. (इनपुट भाषा)